हिमाचल: 3 साल तक मारा चिट्टा- फिर परेशान होकर IGMC पहुंचे युवक, डॉक्टरों से मांगी मदद

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हिमाचल: 3 साल तक मारा चिट्टा- फिर परेशान होकर IGMC पहुंचे युवक, डॉक्टरों से मांगी मदद


शिमलाः नशा एक ऐसी बीमारी है जो इंसान को अंदर से खोखला बना देती है। वहीं, इस समय हिमाचल प्रदेश के करीबन आधे से ज्यादा युवा नशे की चपेट में है। वहीं, इन में कुछ ऐसे भी हैं जो नशे की लत को छोड़ना चाहते हैं और शायद इसीलिए वो इस नशे की बुरी आदत से परेशान होकर अब अस्पतालों का रूख कर रहे हैं। 

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ताजा मामला प्रदेश की राजधानी शिमला से सामने आया है। जहां दो युवक अपने नशे की लत को छुड़ाने के लिए प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल IGMC पहुंचे। यहां दोनों युवकों ने नशा छोड़ने के लिए चिकित्सकों के आगे मदद की गुहार लगाई है। मिली जानकारी के अनुसार दोनों युवक नेपाल मूल के बताए जा रहे हैं। 

तीन साल से लगभग हर तरह का नशा कर रहे थे दोनों 

युवकों का कहना है कि वे पिछले 3 साल से लगभग हर तरह का नशा कर रहे हैं। जब उनसे पूछा गया कि नशा कहां से मिलता है, तो इस बात पर उन्होंने बताया कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है, लेकिन उनके दोस्त उन्हें नशा लाकर देते थे। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि शुरूआती दौर में नशा करके अच्छा महसूस होता था, लेकिन बाद में इसकी लत लग गई। इतना ही नहीं उन्होंने कई बार चिट्टा खरीदने के लिए घर से चोरी भी की है।

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वहीं, जब युवकों के नशा करने की बात का पता उनके परिजनों को लगा तो उन्होंने युवकों को नशा छोड़ने के लिए प्रेरित किया और डॉक्टर की सलाह लेने की बात कही। परिजनों के समझाने पर दोनों युवक IGMC शिमला पहुंचे। आईजीएमसी में आपातकाल विभाग के सीएमओ डॉ कर्नल महेश ने जानकारी देते हुए बताया कि नशे से पीड़ित युवकों को इसे छोड़ने के लिए प्रेरित किया गया। इसके साथ ही मनोचिकित्सक डॉक्टर से काउंसलिंग करवाने की बात भी कही।

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डॉ कर्नल महेश ने बताया कि उनके पास हर रोज 4 या 5 युवक ऐसे आते हैं, जो नशा करते हैं। इन युवकों को पुलिस पकड़ कर लाती है। डॉ कर्नल महेश का कहना है कि नशे के आदी हो चुके युवक शर्म के कारण सामने नहीं आते और नशे के जाल में फंसते जाते हैं। कई युवा नशा छोड़ना चाहते हैं, लेकिन उन्हें मौका और सहयोग नहीं मिल पाता है। उन्होंने डॉक्टरों से ऐसे युवकों की मदद और सहयोग का आग्रह किया है।

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