हिमाचल: राहत कोष के आवंटन में गड़बड़ी- पहले कम पैसे भेजे, स्वर्गवास के बाद जारी किया बकाया

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हिमाचल: राहत कोष के आवंटन में गड़बड़ी- पहले कम पैसे भेजे, स्वर्गवास के बाद जारी किया बकाया

कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री राहत कोष के आवंटन में बड़ी धांधली होने की खबर सामने आ रही है। इस मामले को लेकर सूबे के प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने भी सरकार को घेरा है। 

बतौर रिपोर्ट्स, मामला कांगड़ा जिले का है, जहां स्थित देहरा के साथ लगते एक गांव की कैंसर पीड़िता को मुख्यमंत्री राहत कोष से उसके इलाज के लिए 20 हजार रुपए जारी किए गए थे लेकिन विभाग द्वारा उक्त परिवार को 20 हजार के बदले मात्र 11 हजार रूपए ही एसडीएम कार्यालय द्वारा दिए गए। 

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वहीं, पीड़ित परिवार द्वारा आरोप लगने के बाद एसडीएम देहरा के कार्यालय की तरफ से यह स्पष्टीकरण दिया गया है कि उन्हें कैंसर पीड़िता के इलाज के लिए देने को 11 हजार रुपए के हिसाब से ही राशि आई थी। 


वहीं, मामला मीडिया में सामने आने के बाद एसडीएम देहरा के कार्यालय ने उस समय भी माना था कि परिवार को आए पत्र में कुछ खामी रह गई होगी। जिसके बाद एसडीएम देहरा के कार्यालय ने शिमला स्थित कार्यालय को पत्र में लिखी राशि के बारे में अवगत करवाया गया। 

8 महीने पहले ही हो गया है महिला स्वर्गवास 

वहीं, अब विभाग ने दोबारा पत्र लिख कर उक्त परिवार को बकाया 9 हजार रुपए जारी कर दिए है। वहीं इस मामले को लेकर कांग्रेस ने भी सरकार कि कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगाने शुरू कर दिए है। 

कांग्रेस नेता सपन सूद ने इस बारे में कहा कि मामला सामने आने के बाद हरकत में आए सामान्य प्रशासन विभाग के अवर सचिव द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में बकाया 9000 रुपए कैंसर पीड़िता पवना देवी के नाम जारी करके मामले की लीपापोती करने की कोशिश में विभागीय लापरवाही को हास्यस्पद बना दिया है। 

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मामला उजागर होने के उपरांत अनजाने में राहत राशि 11000 रुपए टाइप होने की बात करके पीड़िता पवना देवी को पत्र की कॉपी जारी करके एसडीएम देहरा के कार्यालय से सम्पर्क करके बकाया स्वीकृत राशि लेने को कहा गया है लेकिन दुर्भाग्य की विडंबना की पीड़िता पवना देवी का स्वर्गवास हुए लगभग 8 माह हो गए हैं।

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सपन सूद का कहना है कि राहत राशि आवंटन मामला संदिग्ध होने के कारण वित्तीय अनियमितताओं के आरोप झेल रहे प्रदेश सरकार के वित्त विभाग ने अपना दामन साफ दिखाने के उद्देश्य से खानापूर्ति करके मामले से पीछा छुड़वाने की कोशिश की है लेकिन इस दौरान कैंसर पीड़िता की मौत हो जाने उपरांत मृतका के नाम स्वीकृत जारी करके विभागीय कार्यप्रणाली को संदिग्ध बना दिया है।

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