पंजाब पे कमीशन में ऐसा क्या है जो हिमाचल के कर्मचारियों को ठीक नहीं लगा: यहां समझें सबकुछ

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पंजाब पे कमीशन में ऐसा क्या है जो हिमाचल के कर्मचारियों को ठीक नहीं लगा: यहां समझें सबकुछ



शिमला। हिमाचल प्रदेश के दो लाख नियमित कर्मचारियों और एक लाख 20 हजार पेंशनरों को छठा वेतनमान जल्दी ही मिल जाएगा। पंजाब में इसे लागू करने और एक साल का एरियर देने के ऐलान के बाद हिमाचल सरकार पर दवाब रहेगा। वैसे प्रदेश सरकार बजट में इसकी घोषणा कर चुकी है। लेकिन हिमाचल प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को पंजाब द्वारा बनाया गया यह नया पे कमीशन रास नहीं आ रहा है। 

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प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ ने पंजाब के छठे वेतनमान की रिपोर्ट को हिमाचल और पंजाब के कर्मचारियों के साथ बड़ा धोखा करार दिया है। अब ऐसे में हिमाचल प्रदेश के सरकारी कर्मचारी इस बात को लेकर कन्फ्यूज हो गए हैं कि आखिर सही क्या है और गलत क्या। 

तो इस खबर में हम आपको विस्तार से बताने जा रहे हैं कि पंजाब सरकार द्वारा लागू किया जा रहा नया पे कमीशन अगर हिमाचल में लागू हो जाता है, तो इससे क्या बदलाव आएंगे और यह पूरी व्यवस्था किस तरह से काम करेगी। 

यहां समझें हिमाचल में किस तरह काम करेगा छठे वेतन आयोग का सिस्टम 

1-1-2016 से हिमाचल के कर्मचारियों को भी नया वेतनमान मिलेगा,  जिस पर राज्य सरकार को करीब नौ हजार करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। हिमाचल में एक कर्मचारी के वेतन में नौ से 10 फीसदी राशि की बढ़ोतरी नए वेतनमान के बाद होनी तय है। 

सरकार के लिए राहत की बात ये है कि उसने पहले ही कर्मचारियों को अंतरिम राहत प्रदान कर दी है, जो कि बेसिक पे में शुमार हो जाएगी और इस तरह अचानक से ज्यादा परेशानी प्रदेश सरकार को नहीं होगी।

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इस वक्त 21 फीसदी राहत यहां के कर्मचारियों को मिल रही है, जो कि पे स्केल में एडजस्ट हो जाएगी। 153 फीसदी डीए यहां के कर्मचारियों को मिल रहा है जोकि महंगाई भत्ता है। 

नए वेतनमान के लागू होने पर यह महंगाई भत्ता मर्ज हो जाएगा और शुरूआत से कर्मचारियों को 18 फीसदी के आसपास डीए मिलना शुरू होगा। इसी तरह की व्यवस्था पेंशेनरों के लिए भी होगी। सूत्रों की मानें तो सचिवालय से सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को नुकसान हो सकता है। 

क्या हिमाचल भी एक ही साल का एरियर देगा ?

पंजाब सरकार ने सचिवालय पे को वेतन का हिस्सा अब नहीं माना है और इसे भत्ते में बदला गया है। अलग-अलग श्रेणियों के कर्मचारियों को 600 रुपए से लेकर 2500 रुपए तक प्रति माह सचिवालय पे दी जाती है। 

पेंशन में भी इसका लाभ मिलता था मगर जब भत्ते में बदल जाएगा तो यह भत्ता सचिवालय से सेवानिवृत्त होने वाले पेंशनरों को नहीं मिलेगा। सवाल ये खड़ा है कि पंजाब की तरह क्या हिमाचल भी एक ही साल का एरियर देगा। 

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पंजाब ने वेतन आयोग की सिफारिशों को मान लिया मगर अभी एरियर वर्ष 2016 का ही दे रहे हैं, जो भी दो किश्तों में देंगे। अब राज्य सरकार क्या पांच साल का एरियर एक साथ देगी इस पर सवाल खड़ा है। 

पेंशनरों को कम्यूटेशन का लाभ दिया जा रहा है। रिटायरमेंट पर व्यक्ति पेंशन का 40 फीसदी पैसा ले सकता है। पंजाब ने इसे 30 फीसदी से बढ़ाकर 40 फीसदी किया है और हिमाचल पहले से 40 फीसदी दे रहा है। ऐसे में प्रदेश सरकार इसकी वर्तमान दर ही रखेगी।

234 श्रेणियों के 90 हजार कर्मियों को कम लाभ

अध्यापकों के साथ स्वास्थ्य विभाग व कुछ दूसरे विभागों के 234 श्रेणियों के कर्मचारियों को इस नए वेतनमान का ज्यादा लाभ नहीं होगा। ऐसा इसलिए है, क्योंकि पंजाब के साथ हिमाचल में इनको वर्ष 2012 में रिवाइज्ड स्केल दे दिया गया है। 

ऐसे प्रदेश में 90 हजार कर्मचारी हैं, जिनको पूरा लाभ इस समय नहीं मिलेगा, बल्कि उनका वेतनमान दूसरे कर्मचारियों के समान यहां पर हो जाएगा।  इन श्रेणियों को पहले से ही ज्यादा वेतनमान दिया जा रहा है जिसे पंजाब के साथ हिमाचल ने भी लागू किया।

तीन वर्गों में बांटे जाएंगे कर्मचारी 

अधिसूचना में दर्शाया गया है कि जिन कर्मचारी वर्गो को 2011 में पांचवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार वेतनमान मिला हैं उनके वेतनमान निर्धारित करते समय किसी भी प्रकार का कटौती फार्मूला नहीं लगेगा। वहीं दूसरी ओर वित्त विभाग ने 2011 में संशोधित वेतनमान पाने वाले सभी कर्मचारी वर्गो के लिए 2।25 गुना बढ़ोतरी का कटौती फार्मूला लगाने के आदेश जारी किए हैं। 

यहां पढ़ें किस बात का विरोध कर रहे कर्मचारी 

वहीं, अब प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष एनआर ठाकुर का इस मसले पर कहना है कि पांच वर्ष के लंबे इंतजार के बाद जो रिपोर्ट आई है वह छल से भरी पड़ी है। वेतनमानों को लेकर सारा आकर्षण काफुर हो गया। यह रिपोर्ट खोदा पहाड़ निकली चुहिया जैसी साबित हुई। रिपोर्ट में 2011 को दिए ग्रेड पे चालाकी के साथ मर्ज कर दिए गए हैं। 

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उन्होंने कहा कि एरियर का भुगतान नौ किस्तों में साढ़े चार सालों में होगा, जो ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। सभी भत्ते 2021 के बाद दिए जाएंगे। बहुत से भत्तों को खत्म कर दिया गया। यह वेतनमान केंद्र के वेतनमानों से फिसड्डी साबित हुआ है। एक कर्मचारी पहले 10 साल वेतन निर्धारण का इंतजार करे। फिर अगले 10 साल उसे लागू करवाने के लिए संघर्ष करे। उसके बाद जब सरकार वेतनमान देती है तो वह भी टुकड़ों में। 

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बकौल एनआर ठाकुर, माचल सरकार भी पिछले चार वर्षों से कर्मचारियों की कोई सुध नहीं ले रही है। जेसीसी का न होना सरकार की असफलता को दर्शाता है। समस्याओं का अंबार लगा है। लेकिन सरकार के कानों में कोई जूं नहीं रेंगती। जब चुनाव आते है तो कर्मचारियों की याद आती है, चुनाव निकलते ही सारे मुद्दे ठंडे बस्ते में चले जाते हैं। ऐसी सरकार की बेरुखी और उदासीनता कर्मचारी कब तक झेलेंगे। 

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