आपदा के हीरो: भीमसेन ने 22 जिंदगियां बचाईं और खुद परिवार समेत मलबे में बहे- ना होते तो क्या होता

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आपदा के हीरो: भीमसेन ने 22 जिंदगियां बचाईं और खुद परिवार समेत मलबे में बहे- ना होते तो क्या होता


कांगड़ा।
हिमाचल प्रदेश में सोमवार को आई जलप्रलय ने कई लोगों से घर, किसी से परिवार तो किसी से जिंदगी छीन ली। कांगड़ा जिले ने इस तबाही का सबसे बुरा दंश झेला, जिसके दाग सालों तक नहीं मिटाए जा सकेंगे। आपदा की इस घड़ी में जहां हर कोई अपना-अपना बचाने में जुटा हुआ था। 

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वहीं, जिले में शाहपुर के रुमेहड़ गांव निवासी भीमसेन ने कुछ ऐसा किया, जिसके लिए उन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। लोगों का कहना है कि अगर भीमसेन वहां पर मौजूद ना होते तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती थी लेकिन इस वजह के चलते आपदा के वक्त हीरो बना यह शख्स हमारे बीच मौजूद नहीं है। 

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बतौर रिपोर्ट्स, रुमेहड़ गांव के भीमसेन 22 जिंदगियां बचाकर खुद परिवार सहित मौत के मुंह में चले गए। पंचायत के स्थानीय निवासियों द्वारा इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया गया कि सोमवार रात से काफी बारिश हो रही थी।बारिश की वजह से पहाड़ के नीचे बसे अमर सिंह के घर की ओर छोटा नाला अवरुद्ध होने की वजह से थोड़ा-थोड़ा पानी आ रहा था। सुबह से हम करीब 22 लोग पानी की निकासी के लिए जुटे हुए थे।  

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इस बीच सुबह करीब 10:39 बजे करीब 70 मीटर दूर पहाड़ी पर अपने घर से भीमसेन हमें देखकर जोर-जोर से आवाजें लगाईं। उसने कहा कि पहाड़ से मलबा आ रहा है। यहां से भाग जाओ। भीमसेन की आवाज सुनकर सभी सड़क की तरफ भागे। चेतावनी के बाद 10 सेकेंड में ही पूरा मलबा नीचे मकानों को बहाकर ले गया। 

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हम सभी लोग वहां से भाग कर सड़क पर आ गए। मलबा अधिक होने के चलते एक घर के नीचे छिप गए। जब यह घर भी बहने लगा तो हम सभी भागकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचे। सुरक्षित स्थान तक पहुंचने के लिए सभी को कुछ सेकेंड ही लगे। उन्होंने कहा कि यह भगवान की कृपा है कि हम आज जिंदा है। 

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अगर हम नालियां न बना रहे होते और भीमसेन हमें मलबे के आने की चेतावनी नहीं देता तो आज हम जिंदा नहीं होते। यह हमारा दूसरा जन्म है। भीमसेन हमें चेतावनी देने के बाद अपने घर में परिवार को बाहर निकालने के लिए अंदर भागा लेकिन बाहर आने से पहले ही उनका पूरा मकान मलबे की चपेट में आ गया। 

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