तबाही तस्वीरों में: 7 जिंदगियां अभी भी लापता, 502 करोड़ का नुकसान; लोग-मवेशी सब मलबे में दबे

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तबाही तस्वीरों में: 7 जिंदगियां अभी भी लापता, 502 करोड़ का नुकसान; लोग-मवेशी सब मलबे में दबे


शिमला।
हिमाचल प्रदेश में मौसम अपना रौद्र रूप दिखा रहा है सुबी में मानसून का आगम होने के लगभग एक माह बाद एक्टिव हुआ मानसून बड़ी ही तेजी के साथ अपने रंग बदल रहा है, जो कि हिमाचल प्रदेश और यहां के लोगों के लिए काफी नुकसानदायक सिद्ध हुआ है। 

बीते कल सूबे के अलग-अलग जिलों में हुई खतरनाक बारिश और बादल फटने की घटनाएं सामने आने की वजह से एक दर्जन से अधिक लोगों को अपने जान से हाथ धोना पड़ गया है। वहीं, इस बाढ़ और मलबे में लापता हुए कुल आधा दर्जन से अधिक लोगों का अभी तक कुछ पता नहीं चल सका है। 


बतौर रिपोर्ट्स, कुल्लू जिला की मणिकर्ण घाटी में भी ब्रह्मगंगा में आई बाढ़ में लापता चार लोगों की तलाश जारी है। वहीं, लाहुल स्पीति के तोजिंग नाला में 10 लापता लोगों में से 7 के शव बरामद कर लिए गए हैं, लेकिन तीन लोग अब भी लापता है। जिसकी तलाश में एनडीआरएफ, आईटीबीपी, पुलिस, दमकल और डीडीएमए की टीमें लगातार जुटी हुई हैं।


हिमाचल प्रदेश में मानसून सीजन के दौरान जानमाल का भारी नुकसान हुआ है। 502 करोड़ की चल अचल संपत्ति आपदा के चलते ध्वस्त हो गई। 152 लोगों ने सड़क हादसों से लेकर भूस्खलन, बाढ़ या बादल फटने जैसी घटनाओं के चलते जान गंवाई।


अकेले पीडब्ल्यूडी विभाग को 347 करोड़ का नुकसान हुआ है। जल शक्ति विभाग को 147 करोड़, ऊर्जा विभाग को 57 लाख का नुकसान हुआ।


वहीं, सिरमौर जिले से सामने आई ताजा अपडेट के अनुसार यहां स्थित ट्रांस गिरि इलाके के बियोग गांव में गोशाला पर पहाड़ी गिरने से आधा दर्जन मवेशियों की मलबे में दबने से मौत हो गई है। इससे प्रभावित कंठी राम को भारी नुकसान पहुंचा है। घटना उप तहसील हरिपुरधार के बियोंग गांव में गत रात करीब साढ़े 9 बजे पेश आई। मलबा इतना अधिक था कि गोशाला का नामोनिशान मिट गया और सभी मवेशी जिंदा ही मलबे में दफन हो गए। 

वहीं, लाहुल में बादल फटने से नाले में बह गए लोगों की तलाश को सर्च अभियान जारी है। सुबह से पुलिस जवानों सहित एनडीआरएफ और आईटीबीपी के जवान सर्च अभियान में जुटे हुए हैं। तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉक्टर रामलाल मार्कंडेय भी समस्त प्रशासनिक अधिकारियों के साथ घटनास्थल पर डटे हुए हैं और जवानों का हौसला बढ़ा रहे हैं। स्थानीय महिलाएं भी सर्च ऑपरेशन में जुटे हुए जवानों को चाय व खाना खिलाकर अपना योगदान दे रही हैं। लाहुल घाटी में जगह जगह फंसे लोगों को ग्रामीणों ने शरण दी हुई है।

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