हिमाचलः नेताओं ने की शहीद पति की अनदेखी तो पत्नी ने पाई-पाई जोड़कर बनवा दिया स्मारक

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हिमाचलः नेताओं ने की शहीद पति की अनदेखी तो पत्नी ने पाई-पाई जोड़कर बनवा दिया स्मारक

सिरमौरः हिमाचल के वीर शहीद जवान की विधवा अपने पति के प्रति पेम और उनके बहादुरी के सम्मान में स्मारक का निर्माण करवा दिया. यह निर्माण ख़ास इसलिए हो जाता है क्योंकि सरकार ने वर्षों पहले परिवार से यह वादा किया था. लेकिन पूरा नहीं हो पाया. जिसके बाद महिला ने अपनी वर्षों की मेहनत से पाई-पाई जोड़कर स्मारक बनवा दिया.

मामला प्रदेश के सिरमौर जिले स्थित भवाई पंजायत के अंतर्गत आते गांव कुफर का है। जहां क्षेत्र के वीर सपूत नायक कुलदीप सिंह 21 जुलाई 2001 में  सियाचिन ग्लेशियर की चपेट में आने से शहीद हो गए थे। जिसके बाद नेताओं की ओर से परिजनों को उनका स्मारक बनाने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन चुनाव खत्म होते ही सब उनके द्वारा किए वादे को भूल से जाते हैं।

नेताओं ने की अनदेखी, तो खुद स्मारक बनाने की ठानी:

सरकार और नेताओं द्वारा किए वादे की अनदेखी होने पर शहीद की पत्नी ने स्वंय ही अपने पति का स्मारक बनवाकर उन्हें श्रद्धांजलि देने की ठानी। जिसके बाद पत्नी फुलमा ने पाई-पाई जोड़कर 60 हजार रूपए इकट्ठे किए और गांव में अपने पति का स्मारक बनवा डाला। मिली जानकारी के अनुसार उन्होंने राजस्थान जाकर अपने शहीद पति की प्रतिमा बनवाई।

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बता दें कि शहीद कुलदीप सिहं की 20वीं पुण्यतिथि पर भवाई पंचायत प्रधान जोगेंद्र ठाकुर ने उनकी प्रतिमा का अनावरण किया। इस उपलक्ष पर प्रधान ने फुलमा देवी द्वारा स्वयं ही क्षेत्र के वीर सपूत की प्रतिमा बनवाने के लिए उनकी प्रशंसा की। इस दौरान एक सादे समारोह में गांव के लोगों ने शहीद की प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। 

सेना ना होती तो अनाथ हो जाते मेरे बच्चे:

वहीं, शहीद की पत्नी फुलमा देवी ने जानकारी देते हुए बताया कि पति की शहादत के कुछ समय बाद ही अधरंग से उनका आधा शरीर बेकार हो गया। यदि सेना मदद न करती तो शायद मेरे बच्चे अनाथ हो जाते। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार एवं स्थानीय नेताओं द्वारा शहीद की याद में कोई संस्थान एवं स्मारक न बनाए जाने का मलाल उन्हें हमेशा रहेगा।

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हिमाचल प्रदेश देवभूमि होने के साथ-साथ वीरभूमि भी है। यहां से हर साल सैकड़ों नवयुवक देश सेवा के लिए सेना में शामिल हो जाते हैं। वहीं, अबतक हिमाचल से ताल्लुक रखने वाले ढेरों वीर सपूत ऐसे भी हुए हैं जिन्होंने देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए अपने प्राण तक न्यौछावर कर दिए हैं। वहीं, इन जवानों की शहादत के बाद सूबे के नेताओं द्वारा महौल बनाने के लिए शहीद के नाम पर स्मारक, सड़क और ना जाने क्या-क्या बनाने संबंधी ऐलान कर दिया जाता है।

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