आपदा के हीरो: 15 पड़ोसियों को तो बचाया ही खुद को भी नहीं आने दिया आंच

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आपदा के हीरो: 15 पड़ोसियों को तो बचाया ही खुद को भी नहीं आने दिया आंच

कांगड़ा: बोह वैली में आए जलजले ने सब कुछ तबाह कर दिया। तबाही के मंजर के बाद राहत बचाव टीम को भी पहुँचने में घंटों लगे। सड़कें भी अवरुद्ध हो गई थीं। इन सबके बीच स्थनीय लोग ही मसीहा बनकर सामने आए। ऐसी ही कहानी साझा की रमेश कुमार ने।

आंखों के सामने मलबा बन गया घर:

रमेश कुमार ने बताया कि यह उनका भाग्य ही है कि वह आज जिंदा हैं। रमेश ने न सिर्फ अपनी जान बचाई बल्कि कई और लोगों को सुरक्षित बचा कर बाहर आए। उन्होंने बताया कि प्रभावित क्षेत्र से उनके मित्र करतार का फोन आया कि उनके घर के पास नाली से पानी उनके घर की ओर आ रहा है और अंदर घुस रहा है। 

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उन्होंने उपप्रधान पप्पू राम के साथ वहां फंसी एक लोहे की प्लेट को हटाना शुरू किया। इसी बीच आवाजें आईं कि यहां से भागो, तो वे सब कुछ छोड़ कर भागे। इस दौरान उन्हें भी कई चोटें आईं, लेकिन वे अन्य लोगों के साथ दूसरों घरों की ओर भागे और अन्य लोगों को भागने के लिए कहा। 

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इस तरह उन्होंने करीब 10-15 लोगों की जान बचाई। इस दौरान कुछ जो घरों से नहीं निकल पाए, वे मलबे में दब गए। उनकी आंखों के सामने पांच सात भवन मलबे की चपेट में आ गए और कई लोग फंसे रह गए। रमेश अब वहां काम में लगे लोगों को भोजन करवाने सहित अन्य कार्यों में जुटे हुए हैं।

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