'HPU में बढ़ा ABVP का दबदबा तो बौखलाई SFI ने की छात्रा से मारपीट, बाहर से लाए गुंडे'

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'HPU में बढ़ा ABVP का दबदबा तो बौखलाई SFI ने की छात्रा से मारपीट, बाहर से लाए गुंडे'


शिमला।
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में स्थित हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय का माहौल बीते कुछ दिनों से बिगड़ा हुआ। अब इसके पीछे का कारण विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच हिंसक संघर्ष हो या विश्वविद्यालय के कुलपति के सामने किया गया अराजक प्रदर्शन। कहीं ना कहीं इन पूरे विवादों से विश्वविद्यालय का नाम खराब हो रहा है। इसी कड़ी में आज एक बार फिर छात्रा कार्यकर्ताओं पर टिप्पणी करने पर एबीवीपी और एसएफआई कार्यकर्ता भिड़ गए। विधि विभाग के बाहर दोनों संगठनों के कार्यकर्ताओं में मारपीट हुई।

अब इस पूरे मामले को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् की तरफ से SFI के ऊपर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ABVP के प्रिंट मीडिया सह प्रमुख खेमराज की तरफ से जारी की गई विज्ञप्ति में बताया गया कि आज जब एबीवीपी के तमाम कार्यकर्ता विधि विभाग में प्रवेश परीक्षा देने आए प्रदेश भर के छात्रों की सहायता कर रहे थे । तो एस एफ आई के एक कार्यकर्ता ने एबीवीपी की छात्रा कार्यकर्ता को टिप्पणी कर उसके साथ मारपीट की। 

इस मामले को लेकर विश्वविद्यालय इकाई अध्यक्ष विशाल सकलानी ने कहा कि एबीवीपी के छात्रों के बीच में बढ़ते प्रभाव को देख कर एसएफआई बीते कुछ दिनों से एबीवीपी के कार्यकर्ताओं को जबरदस्ती अश्लील और भद्दी टिप्पणियां कर उकसाने का काम कर रही है, ताकि हिंसा का कारण खोज कर हिंसात्मक माहौल बना कर अपना अस्तित्व बनाए रख सके। एसएफआई स्वयं को महिलावादी बता कर ढ़ोंग रचाने का काम कर रही है। 


विशाल सकलानी ने आगे बताया कि एसएफआई  के फर्जी महिलावादी छात्राओं के साथ मारपीट करने से भी नहीं रुके। छात्राओं को अश्लील टिपण्णी करना और मारपीट करना बहुत शर्मनाक है। बकौल सकलानी, विद्यार्थी परिषद् के लंबे संघर्ष के बाद प्रदेश विश्वविद्यालय में परिषद् का प्रभाव बढ़ा है। ऐसे में एस एफ आई पूरी तरह से बौखलाई हुई है। अपने अस्तिव की लड़ाई लड़ रही एसएफआई  अपने अस्तित्व को बचाए रखने के लिए अंतिम और हिंसक प्रयास कर रही है। 

इतना ही नहीं प्रदेश विश्वविद्यालय में हिंसात्मक कगतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए पूरी रणनीति के तहत विश्वविद्यालय से बाहर गैर कानूनी तरीके से गुंडों को लाया जा रहा है। विशाल ने कहा कि एसएफआई में लगभग 70% लोग ऐसे है जो विश्वविद्यालय के छात्र नहीं है। उन्हें एसएफआई के द्वारा हिंसात्मक गतिविधियों को बढावा देने के लिए ही विश्वविद्यालय बुलाया जा रहा है। ताकि एसएफआई अपने विचरानुसर हिंसा कर विश्वविद्यालय में लोकतंत्र का दमन कर स्वयं का प्रभुत्व बना सके। 


विशाल ने कहा कि एसएफआई  बौखलाई हुई है और अपने अंतिम चरण पर है। एसएफआई प्रदेश भर में बेनकाब हो चुकी है। इसी लिए हिंसात्मक माहौल बना कर अस्तित्व को बचाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि एसएफआई को प्रदेश और प्रदेश विश्वविद्यालय में बैन किया जाए व छात्राओं के साथ बदसलूकी करने वाले एसएफआई के कार्यकर्ताओं को निष्कासित कर विश्वविद्यालय परिसर से बैन किया जाए। 

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