हिमाचल कांग्रेस के विधायक ने पेट पालने के लिए सिले थे जूते: अब 70 साल बेटा भी कर रहा वही काम

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हिमाचल कांग्रेस के विधायक ने पेट पालने के लिए सिले थे जूते: अब 70 साल बेटा भी कर रहा वही काम


बिलासपुरः
आज के दौर में जहां एक बार कोई नेता विधायक, मंत्री या सांसद बन जाता है तो वह अपने कार्यकाल के दौरान इतना धन अर्जित कर लेता है कि उसके परिवार में आने वाली एक-दो पीढ़ियों तक लोग आसानी से अपना जीवन यापन कर सकें। लेकिन पहले के दौर में ऐसे नहीं होता था, पुराने जमाने के नेता अपने काम से काम रखते हुए जनता की सेवा में अपने आप को समर्पित कर देते थे। अपनी राजनीति से धनोपार्जन करने की उनकी कोई भी मंशा नहीं होती थी। 

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इसी कड़ी में ताजा मामला सूबे के बिलासपुर जिले से सामने आया है। जहां जिले के सदर विधानसभा क्षेत्र के पहले विधायक रहे सरदारू राम का परिवार आज गरीबी का जीवन जीने को मजबूर हैं। एक समय ऐसा भी था जब खुद विधायक रह चुके सरदारू राम को चुनाव हारने के बाद अपने परिवार का पालन पोषण करने के लिए मोची का काम करने के लिए मजबूर होना पड़ा था। 

बहू ने कहा- हमें इमानदारी और मेहनत पर गर्व है 

वहीं, अब विधायक के निधन के बाद भी उनके परिवार की स्थिति में कोई खासा बदलाव नहीं हुआ है। सरदारू राम की मौत के बाद उनके बेटे प्रीतम उर्फ मीनू राम ने भी मोची की दुकान कर अपने परिवार का पालन पोषण किया। लेकिन अब वे बूढे हो चुके हैं जिस वजह से वे अब घर में ही रहते हैं। बता दें कि मीनू के दो पुत्र हैं। जो मेहनत मजदूरी कर ईमानदारी के साथ जीवन यापन कर रहे हैं।

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सरदारू राम की बहू व मीनू राम की धर्मपत्नी बिमला देवी का कहना है कि उनके परिवार में सभी ईमानदार व मेहनती लोग है जिस पर उन्हें गर्व है। लेकिन, उन्हें एक बात का हमेशा मलाल रहेगा कि प्रदेश की किसी भी सरकार ने (कांग्रेस व बीजेपी) उनकी आर्थिक सहायता नहीं कि और ना ही उनके बेटों को कहीं रोजगार मिल पाया, जिससे आज भी उनके घर की आर्थिक स्थिती खराब है।

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वहीं, इस मामले पर बिलासपुर सदर से पूर्व विधायक रहे बाबूराम गौतम ने जानकारी देते हुए बताया कि विधायक सरदारू राम एक साधारण से इंसान थे और उन्होंने विधायक रहते लोगों की खूब सेवा की थी। इसका नतीजा है कि उनका परिवार आज भी साधारण जिंदगी जी रहा है। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश सरकार से पूर्व विधायक सरदारू राम के परिवार की मदद करने की अपील करते हुए कहीं रोजगार उपलब्ध करवाने की अपील की है।

1954 में जिला बना था बिलासपुर- पहली बार जीते फिर हार गए 

1954 से पहले बिलासपुर कहलूर रियासत के नाम से जाना जाता था। जिसके अंतिम शासक राजा आनंद चांद थे। वहीं, 1 जुलाई 1954 को बिलासपुर को  हिमाचल प्रदेश का पांचवां जिला बनाया गया। इस दौरान सन् 1957 को हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की ओर से बिलासपुर सदर सीट से सरदारू राम सदस्य चुनकर गए। जिन्होंने अपना हित ना देखकर लोगों के लिए काम किया। 

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इस दौरान सन् 1962 में दुबारा हुए विधानसभा चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। उस दौरान पेंशन सुविधा ना होने के कारण सरदारू राम को अपने परिवार के जीवन यापन के लिए मोची का काम करना शुरू किया। उन्होंने अपने परिवार के लिए एक मिट्टी का घर बनाया जो आज भी बिलासपुर के औहर में देखने को मिलता है।

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