हिमाचल: दिव्यांग परिवार लिफाफे बनाने को मजबूर, PM की चिट्ठी के बाद भी रोजगार नहीं दे रही सरकार

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हिमाचल: दिव्यांग परिवार लिफाफे बनाने को मजबूर, PM की चिट्ठी के बाद भी रोजगार नहीं दे रही सरकार


कांगड़ाः
हिमाचल प्रदेश में ना जानें कितने ही परिवार ऐसे हैं जिन्हें ना सरकार का कोई सहारा है और ना ही प्रशासन का। आज हम आपको एक ऐसे ही दिव्यांग परिवार के बारे में बताने जा रहे हैं तो प्रदेश के कांगड़ा जिले स्थित कोटला से ताल्लुक रखता है। 

इस दिव्यांग परिवार में तीन सदस्य हैं। कमल किशोर उनकी पत्नी आशा कुमारी जो शरीर से 50 प्रतिशत अपंग हैं। वह उनकी एक 8 वर्षीय बेटी स्मृति जो शरीर से 80 प्रतिशत विक्लांग है। जो व्हीलचेयर की सहायता से ही चल पाती है। 

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ये दिव्यागं परिवार मंहगाई के दस दौर में लिफाफे बनाकर जैसे-तैसे अपना गुजारा कर रहा है। अपनी पारिवारीक स्थिति सुधारने व अपनी बेटी का उपचार करने के लिए इस दंपत्ति जोड़े ने कई बार सरकार व प्रशासन से मदद की गुहार लगाई लेकिन उनके कानों पर मानों जूं तक नहीं रेंगी। परिवार का कहना है कि उन्होंने नौकरी दिलाने के संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 29 जुलाई 2015 को एक पत्र लिखा था। जिसका जवाब उन्हें 4 अगस्त 2015 को मिला। 

"बेटी बचाओ ,बेटी पढ़ाओ" कर रही सरकार लेकिन मेरी बेटी को कोई सहारा नहीं

इसके बाद उन्होंने एक पत्र तत्कालीन हिमाचल सरकार को भेजा था कि विकलांग कोटे में नौकरी दी जाए मगर अभी तक उन्हें कोई नौकरी नहीं मिली। आशा कुमारी का आरोप है कि एक तरफ तो सरकार "बेटी बचाओ ,बेटी पढ़ाओ" पर जोर दे रही है लेकिन मेरी बेटी को कोई सहारा नहीं दे रहा है। यहां तक कि हमारे घर तक रास्ता नहीं बना है जिसके लिए हम कई बार मांग कर चुके हैं।

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वहीं, इस मामले पर कमल किशोर ने जानकारी देते हुए बताया कि उनके घर को जाने वाला रास्ता सीढ़ीनुमा है तथा सीढ़ियों को चढ़ना मुश्किल हो जाता है। उन्‍होंने सीढ़ियों के साथ-साथ सीधा रास्ता बनाने की भी मांग की है ताकि उससे व्हीलचेयर से बेटी को लाया व ले जाया जा सके। अपनी स्थिति के बारे में परिवार ने हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव राम सुभाग सिंह से बात करनी चाही और कई बार तो उनके मोबाइल व दूरभाष पर बात करने की कोशिश भी की मगर उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

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वहीं, जब इस बारे में एसडीएम जवाली कृष्ण कुमार शर्मा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मुझे इसकी जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा उक्त अपाहिज परिवार की यथासंभव सहायता की जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि नायब तहसीलदार कोटला को मौका पर भेजा जाएगा तथा उनके घर को जाने वाले रास्ते को पक्का करवाया जाएगा।

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