वीरभद्र सरकार के मंत्री के दाग तो धो देगी BJP, घोटाले से जुड़े अधिकारियों पर होगी कार्रवाई!

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वीरभद्र सरकार के मंत्री के दाग तो धो देगी BJP, घोटाले से जुड़े अधिकारियों पर होगी कार्रवाई!

शिमला:
वीरभद्र सरकार में घोटाला करने का आरोप बागवानी मंत्री सिंघी राम पर लगे। मंत्री जी ने अब पाला बदलकर भाजपा जॉइन कर लिया है। मामले की जांच तो जारी रहेगी मगर मंत्री जी को इससे बाहर रखने की तैयारी चल रही है।

धूमल के कार्यकाल में शुरू हुई थी जांच:

यह मामला वर्ष 2005 का है। उस समय दिवंगत वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री हुआ करते थे। प्रेम कुमार धूमल ने मुख्यमंत्री रहते हुए मामले की जांच शुरू की और सिंघी राम को लपेटने की पूरी तैयारी थी। मगर सरकार रिपीट नहीं हो पाई।

जयराम ठाकुर के मुख्यमंत्री बनने के बाद दोबारा से घोटाले की फाइल खोली गई। लेकिन सरकार को तत्कालीन मंत्री सिंघी राम के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले हैं। इस बीच सिंघी राम ने भाजपा का दामन भी थाम लिया है।


सरकार ने इस मसले पर अभियोजन अधिकारियों से राय मांगी थी। अभियोजन अधिकारियों का कहना है कि पूर्व मंत्री को इस प्रकरण से बाहर कर भी जांच जारी रखी जा सकती है। इसमें कुछ अधिकारियों के खिलाफ ठोस सुबूत हैं।

विजलेंस ने दर्ज किया था मामला:

इस मामले की जांच 2008 में शुरू हुई थी। इसे विजिलेंस ने शिकायत संख्या 10/2008 के रूप में दर्ज किया था। कांग्रेस के खिलाफ भाजपा की चार्जशीट में शामिल किया गया था।


आरोप थे कि वीरभद्र सरकार में सिंघी राम बागवानी मंत्री थे तो यह खरीद दिसंबर 2005 में की गई। दो तरह की प्रूनिंग कैंचियों और आरी की खरीद में अनियमितता बरती गई।

जर्मनी के कंपनी की कम कीमत को छोड़ अधिक दामों पर हुई खरीद:

आरोप हैं कि मैसर्ज हर्बल नई दिल्ली को लगभग 25 से 26 लाख का अनुचित लाभ पहुंचाया। वास्तविक से ज्यादा दरों पर कैंचियां खरीदी गईं। करीब 66 लाख की खरीद सरकारी उपक्रम हिम एग्रो के माध्यम से उद्यान विभाग के दिशा-निर्देशों पर की गई। इसमें लगभग 10-11 लाख की अधिक अदायगी की गई। कंपनी को परिवहन और ऑपरेशनल चार्ज दिए, जो इस फर्म को देय नहीं थे।


जर्मनी की कंपनी ने कैंचियों के रेट 712.12 और 360.18 रुपये के अनुसार तय किए। आरी का क्रय 475.16 रुपये हुआ। जर्मनी की कंपनी के बजाय नई दिल्ली की फर्म से दो तरह की कैंचियों की खरीद 1231.25 और 692 रुपये में की गई। प्रति आरी की खरीद 825 रुपये के हिसाब से की गई। इस फर्म ने इन्हें जर्मनी की इस कंपनी से ही खरीदा।

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