हिमाचल में कोरोना के बीच स्क्रब टायफस भी हुआ जानलेवा: 19 साल की लड़की का दुखद निधन

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हिमाचल में कोरोना के बीच स्क्रब टायफस भी हुआ जानलेवा: 19 साल की लड़की का दुखद निधन


शिमला।
हिमाचल प्रदेश के सिर पर मंडरा रहे कोरोना वायरस की तीसरी लहर के खतरे के बीच सूबे में एक बार फिर से स्क्रब टाइफस के मामले बढ़ने लग पड़े हैं। प्रदेश में कोरोना संक्रमण के चलते रोजान जा रही लोगों की जान के बीच बीते कल एक और परेशान करने वाली अपडेट सामने आई। 

इस साल हुई पहली मौत, अब तक सामने आ चुके हैं 200 केस 

मिली जानकारी के अनुसार सूबे की राजधानी शिमला स्थित प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी में स्क्रब टायफस की वजह से एक 19 वर्षीय लड़की की जान चली गई। मृतक युवती मंडी जिले की रहने वाली बताई जा रही है। 

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बताया गया कि स्क्रब टायफस की चपेट में आने के बाद युवती को इलाज के लिए आईजीएमसी में भर्ती करवाया गया था, जहां पर बुधवार को उसने आखिरी सांसें ली। बता दें कि स्क्रब टायफस की वजह से सूबे में इस साल हुई यह पहली मौत है। वहीं, अभी तक प्रदेश स्क्रब टायफस के 200 से अधिक मामले रिपोर्ट किए जा चुके हैं। 

क्या बला है स्क्रब टायफस 

स्वास्थ्य विभाग के तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार स्क्रब टाइफस एक रिकेटसिया नामक जीवाणु से फैलता है और ये पिसुओं में पाया जाता है। यह पिस्सू जंगली चूहों में पाए जाते हैं और घास तथा खेतों के माध्यम से आकर घरों में आ जाते हैं। संक्रमित पिस्सू स्वस्थ आदमी को काटता है और स्क्रब टाइफस फैलाता है। 

क्या हैं लक्षण:

स्क्रब टाइफस वाले मरीज को 104 से 105 डिग्री तक बुखार (Fever) रहता है। जोड़ों में दर्द, गर्दन, बाजुओं के निचले भाग व कुल्हों में गिल्टियां होना इसके लक्षण होते हैं। कोई भी लक्षण दिखाई दे तो तुरंत नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र में जाकर डाक्टर को दिखाएं व अपनी मर्जी से दवा न खाएं।

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क्या बरतें सावधानी:

  • घर के आस-पास घास या झाड़ियां ना उगने दें तथा समय-समय पर सफाई करते रहें। 
  • शरीर को स्वच्छ रखें (Keep Clean) और हमेशा साफ कपड़े पहनें। 
  • आसपास जलजमाव बिल्कुल ना होने दें। 
  • घर के अंदर और आसपास कीटनाशकों का छिड़काव (Insecticides Spray) अवश्य करें। 
  • खेतों में काम करते समय हाथ व पैरों को अच्छे से ढककर रखें। 
  • बरसात के मौसम में इस बीमारी के रोगियों की संख्या बढ़ जाती है। 
  • यह रोग एक आदमी से दूसरे को नहीं फैलता है। 

समय पर डाक्टर को दिखाने पर इसका आसानी से इलाज संभव है। स्क्रब टायफस का ज्यादा प्रकोप जुलाई से अक्टूबर तक रहता है। इस मौसम में अधिकतर लोग खेतों और घासनियों में घास काटते हैं।

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