'दिमाग में नहीं होनी चाहिए दिव्यांगता, हर कोई पा सकता सफलता'- निषाद के गोल्डन वर्ड्स

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'दिमाग में नहीं होनी चाहिए दिव्यांगता, हर कोई पा सकता सफलता'- निषाद के गोल्डन वर्ड्स


ऊना।
हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले से ताल्लुक रखने वाले टोक्यो पैराओलंपिक के रजत पदक विजेता पैरा एथलीट निषाद कुमार आज देवभूमि पहुंच गए। इस दौरान उनका कई जगहों पर भव्य स्वागत किया गया। निषाद के ऊना आने की ख़ुशी में अंब से लेकर उनके घर धुसाड़ा तक लोगों ने खूब जश्न मनाया। इस दौरान परिजनों से मिलकर निषाद के आंसू छलक पड़े।

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निषाद कुमार ने टोक्यो पैरालंपिक में जीता रजत पदक देशवासियों को समर्पित किया है। उन्होंने प्रशिक्षकों, परिजनों और सहयोग देने वाले हर व्यक्ति को जीत का श्रेय दिया। 


घर पहुंचने पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान निषाद ने कहा कि कोई भी व्यक्ति मानसिक तौर पर दिव्यांग नहीं होना चाहिए। अगर उसमें कुछ करने का हौसला, दिल में आग हो तो वह अपने जीवन में सफलता पा सकता है। उन्होंने कहा कि अंब के छोटे से गांव से निकलकर पैरालंपिक तक सफर काफी संघर्षपूर्ण रहा है।

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पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि वह शुक्रवार को करीब डेढ़ वर्ष बाद घर लौटे हैं। खुशी की बात यह है कि रजत पदक लेकर लौट रहा हूं। उन्होंने दिव्यांगों से खेलों में बढ़-चढ़कर भाग लेने और आगे बढ़ने की अपील की। निषाद कुमार ने बताया कि टोक्यो पैरालंपिक में जब उन्होंने ऊंची कूद में रजत पदक जीता तो उन्हें इस बात का यकीन नहीं हो पा रहा था। 

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निषाद ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण प्रतिभा को आगे लाने के लिए प्रशिक्षण केंद्र जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल में सुविधाओं के अभाव में उन्हें पंचकूला जाकर प्रशिक्षण लेना पड़ा। आने वाले समय में उनका फोकस स्वर्ण पदक पर रहेगा। कमियों को दूर करने के लिए अभ्यास जारी रहेगा।

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