बीजेपी के अपने ही बने फतेहपुर और अर्की में सिरदर्द: मान तो गए पर नहीं करेंगे प्रचार

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बीजेपी के अपने ही बने फतेहपुर और अर्की में सिरदर्द: मान तो गए पर नहीं करेंगे प्रचार


शिमला:
भाजपा दो सीटों पर नाराज चल रहे नेताओं को निर्दलीय नामांकन दाखिल करने से रोकने में सफल में हो गई है। लेकिन उनका प्रचार से इनकार करना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

पार्टी नहीं व्यक्ति से समस्या:

मंडी लोकसभा सीट के अलावा सभी तीन विधानसभा सीटों पर टिकट नहीं मिलने से भाजपा दो फाट में बंट गई है। वहीं, जुब्बल कोटखाई से चेतन बरागटा ने निर्दलीय नामांकन दाखिल भी कर चुके हैं।

इसके अलावा फतेहपुर और अर्की विधानसभा क्षेत्रों में नाराज नेताओं ने अपने क्षेत्रों में पार्टी प्रत्याशी के लिए प्रचार करने से साफ इनकार कर दिया है। उनका साफ कहना है कि उन्हें पार्टी से नहीं बल्कि व्यक्ति से समस्या है। 

गलत संदेश जाने का डर:

भाजपा के लिए चुनौती यह है कि यदि स्थानीय नेता ही चुनाव प्रचार में नहीं उतरते हैं तो क्षेत्र में गलत संदेश जाएगा और इसका पूरा पूरा लाभ विपक्षी पार्टी अपने पक्ष में लेने का भरपूर कोशिश करेगी।

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इस चुनौती से निपटने के लिए अर्की सीट पर केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर स्वयं गए थे। हालांकि, उनके प्रयास से ही अर्की से टिकट मांग रहे पूर्व विधायक गोविंद राम शर्मा ने निर्दलीय नामांकन नहीं दाखिल किया।

अन्य क्षेत्रों में ड्यूटी लगाने की कर रहे मांग:

साथ ही शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने भी अहम भूमिका निभाई। गोविंद राम उनके करीबी हैं। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने गोविंद राम शर्मा और पूर्व मंत्री नगीन चंद्र पाल की बेटी आशा परिहार को शिमला बुलाकर उन्हें नामांकन नहीं भरने के लिए मनाया। उन्हें सरकार और संगठन में पूरा मान देने की बात की।

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लेकिन आशा परिहार और गोविंद राम ने साफ कर दिया है कि वे और उनके समर्थक किसी भी परिस्थिति में पार्टी के उम्मीदवार के पक्ष में चुनाव प्रचार करने नहीं जाएंगे। उन्होंने अनुरोध किया है कि उनकी ड्यूटी अन्य क्षेत्रों में लगाई जाए।

परमार ने भी किया इनकार:

वहीं, फतेहपुर में पूर्व राज्यसभा सांसद कृपाल परमार से तो खुद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने दो बार बात की। सीएम भी उन्हें मनाने गए और हेलिकॉप्टर में बिठा जुब्बल कोटखाई ले आए। मुख्यमंत्री ने संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देने का भरोसा दिलाया।

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लेकिन परमार ने भी साफ किया है कि वह भी फतेहपुर में प्रचार नहीं कर पाएंगे। कृपाल परमार ने भी कहा है कि उन्हें किसी और क्षेत्र का प्रचार कार्य दिया जाए। आगामी चुनावी समर में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा अपनों से मिल रही चुनौती से कैसे पार पाती है।

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