क्या इमरान-अजीज-सिद्धू और सेना को रेपिस्ट बताने वाले कन्हैया संग मंच साझा करते वीरभद्र सिंह?

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क्या इमरान-अजीज-सिद्धू और सेना को रेपिस्ट बताने वाले कन्हैया संग मंच साझा करते वीरभद्र सिंह?


शिमला/मंडी:
हिमाचल प्रदेश में उपचुनाव का बिगुल बजते ही राजनीतिक सरगर्मी रफ्तार पकड़ने लगी है। बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। 

कांग्रेस पार्टी भाजपा के विरोध में फिर देश की सेना का ही विरोध करना शुरू कर दिया है। बड़ा सवाल है कि क्या राजा साहब होते तो ये सब हो रहा होता जो आज कांग्रेस कर रही है।

राष्ट्रवादी नेता थे वीरभद्र:

सोमवार का दिन कांग्रेस पार्टी के लिए कुछ ठीक नहीं रहा। पहले राजधानी शिमला में मौन व्रत के दौरान प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप राठौड़ ने अपशब्द का प्रयोग किया। जिसके बाद मंडी से प्रत्याशी रानी प्रतिभा सिंह शहीद सैनिकों का अपमान कर बैठीं।

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विदित है कि राजासाहब राष्ट्रवादी विचार के नेता थे। उनकी राजनीति कांग्रेस की परंपरागत तुष्टिकरण की राजनीति से अलग रही है। वो मां भीमाकाली के सच्चे भक्त थे। जीवन में कभी टोपी पहनने की राजनीति नहीं की।

पाकिस्तान परस्त नेता हिमाचल में:

उपचुनाव में कांग्रेस पार्टी ने देवभूमि हिमाचल में चुनाव प्रचार कराने हेतु बाहर के राज्य से विवादित नेता बुलाए हैं। पंजाब के नवजोत सिंह सिद्धू पाकिस्तान जाकर वहां के सेना चीफ जेनरल बाजवा और अपने अजीज मित्र इमरान खान से गले मिलता है।

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सिद्धू के विषय में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा था कि इस व्यक्ति से देश के राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है। ऐसे नेता देवभूमि हिमाचल आकर कांग्रेस के लिए वोट मांगेंगे। दूसरा है कॉमरेड कन्हैया कुमार।


सेना को बता चुका है रेपिस्ट:

बता दें कि कॉमरेड कन्हैया बिहार के बेगूसराय का रहने वाला है। उसने जेएनयू, दिल्ली से पढ़ाई की है और वहां छात्र संघ का अध्यक्ष रहते हुए देशविरोधी नारे लगाए। ऐसी ही गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगा। हालांकि, मामला अभी विचाराधीन है। 

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कॉमरेड कन्हैया भारतीय सेना को रेपिस्ट बता चुके हैं। सेना के बारे में इन्होंने कई बार उलूलजुलुल बातें कर चुके हैं। हिमाचल में इनके भाषण के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता इनके पीछे बैठ मुस्कुराते हैं।

क्या वीरभद्र सिंह मंच साझा करते..?

ऐसे में बड़ा सवाल वही है कि यदि इस उपचुनाव में आज राजा वीरभद्र सिंह होते तो क्या इन नेताओं के साथ राष्ट्रवादी नेता वीरभद्र सिंह मंच साझा करते। आज वीरभद्र सिंह के अनुपस्थिति में उनकी अर्धांगिनी प्रतिभा सिंह भी कारगिल के लड़ाई को छोटा बता कर वीर शहीदों का अपमान कर रही हैं। 

आखिर, प्रतिभा सिंह के ऊपर क्या मजबूरी थी कि उन्हें सेना के लिए ऐसा बयान देना पड़ा। क्या ये सिद्धू- कन्हैया के संगति का असर है या आलाकमान का दवाब। अंत में फिर वही बड़ा सवाल है...यदि आज राजा साहब होते तो क्या इन नेताओं के साथ मंच साझा करते..??

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