हिमाचल के शौर्य चक्र विजेता हुए पंचतत्व में विलीन: साल 2005 में लिखी थी जांबाजी की इबारत

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हिमाचल के शौर्य चक्र विजेता हुए पंचतत्व में विलीन: साल 2005 में लिखी थी जांबाजी की इबारत


सोलनः
हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले से ताल्लुक रखने वाले शौर्यच्रक विजेता नायब सूबेदार जगतराम ने बीते कल इस दुनिया को अलबिदा कह दिया। अपने सेवाकाल में दुशमनों को धूल चटाने वाले वीर प्राक्रमी जवान का अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव रूगी में किया गया। 

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जहां सपाटु सेना छावनी के जवानों ने उन्हें अंतिम सलामी दी। जिसके बाद उनके बेटों ने अपने पिता के पार्थिव शव को मुखाग्नी दी। अंतिम संस्कार की इस विधि में क्षेत्र के लोगों सहित अन्य पूर्व सैनिक भी मौजूद रहे। जिन्होंने शौर्य चक्र विजेता जवान को अंतिम विदाई दी। 

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बता दें कि नायब सूबेदार जगतराम 5 जनवरी 1985 को सेना में भर्ती हुए थे। जहां 26 साल तक अपनी सेवाएं देने के बाद 1 फरवरी 2011 में वे सेवानिवृत्त हुए। उनकी सेवाकाल के दौरान साल 2005 में जब वे जेके राइफल में हवलदार के पद पर तैनाथ थे।

बेटा भी दे रहा है सेना में सेवाएं 

तब इस बीच 9 सितंबर 2005 को जम्मू कश्मीर में ऑपरेशन पीर के दौरान उन्होंने दुश्मनों के साथ लोहा लेते हुए उन्हें ढेर करने में काफी अहम भूमिका निभाई थी। जिस वजह से उन्हें उनके अदमय साहस व वीरता के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने शौर्य चक्र से सम्मानित किया था। 

बता दें कि उनका एक बेटा सेना में अपनी सेवाएं दे रहा है। वहीं, क्षेत्र के वीर सपूत की मौत होने की वजह से इलाके में गम की लहर दौड़ पड़ी है।

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