हिमाचल में मनरेगा के बुरे हाल: करवा लिया काम पर देने को पैसे नहीं, केंद्र ने रोक दिया बजट

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हिमाचल में मनरेगा के बुरे हाल: करवा लिया काम पर देने को पैसे नहीं, केंद्र ने रोक दिया बजट

शिमलाः बेरोजगारी के इस दौर में एक गरीब और मजदूर के परिवार के लिए मनरेगा योजना के तहत होने वाली आय उनके जीवनयापन का एक बड़ा और बेहतर जरिया होती है, लेकिन हिमाचल प्रदेश में इस योजना का हाल बेहाल हो रखा है। दरअसल, यहां सूबे के मजदूरों से मनरेगा के तहत काम तो ले लिया गया है मगर उन्हें भुगतान करने के लिए बजट नहीं है। 

नियमों के तहत इन मजदूरों को 15 दिनों के भीतर भुगतान कर दिया जाना चाहिए, लेकिन यहां कई जगहों पर पिछले तीन महीने से मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया है। बतौर रिपोर्ट, कुल करीब 200 करोड़ का बजट केंद्र के पास अटका पड़ा है जिसका अभी तक केंद्र द्वारा भुगतान नहीं किया गया है और सरकार ने मजदूरों से काम निकलवाने के बाद हाथ खड़े कर रखे हैं।

तीन महीने बाद भी नहीं हुआ भुगतान-

बता दें कि मनरेगा के तहत प्रदेश के विभिन्न इलाकों में कई काम करवाए गए हैं। चाहे वो भूमि सुधार हो, पक्के रास्ते हो या फिर टैंकों का निर्माण करना हो। परंतु कामगारों को उनके द्वारा किए गए काम का अभी तक भुगतान नहीं हो पाया है। जिस से वे काफी परेशान हैं। तीन महीने से ज्यादा वक्त बीत चुका है, लेकिन अभी तक भी लोगों को उनका मेहनताना नहीं मिल पाया है। 

देरी पर कामगारों को ब्याज मिलेगा- 

वहीं, मनरेगा एक्ट 2005 की बात करें तो काम के 15 दिन के अंदर-अंदर ही सभी कामगारों को दिहाड़ी का भुगतान करना होता है। अगर किसी कारणवश भुगतान नहीं हो पाए तो सरकार को मजदूरों को ब्याज भी देना होता है। 

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वहीं, इस मामले पर जानकारी देते हुए हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण विकास विभाग के निदेशक रुग्वेद मिलिंद ठाकुर ने बताया कि प्रदेश में लक्ष्य से ज्यादा काम हुआ है, जिस वजह से काम के लिए निर्धारित से ज्यादा बजट खर्च हो रहा है। यही कारण है कि लोगों को मनरेगा का भुगतान लेट हो रहा है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि इस पूरे वित्तीय वर्ष के लिए हिमाचल को 2 करोड़ 50 लाख मानव दिवस का लक्ष्य दिया गया था, वहीं अगस्त तक ही 2 करोड़ 7 हजार मानव दिवस का लक्ष्य पूरा हो गया।

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जबकि अगस्त तक 1 करोड़ 25 लाख मानव दिवस का लक्ष्य ही निर्धारित था। ऐसे में भारत सरकार से लगभग 100 करोड़ लेबर कंपोनेंट का इंतजार है। बाकी मैटीरियल कंपोनेंट का बजट अलग है। हालांकि, मैटीरियल कंपोनेंट बड़ा मामला नहीं है। इसका समाधान हो जाता है। उन्होंने कहा कि यह मामला भारत सरकार के समक्ष उठाया गया है। इस बारे में जल्द समाधान होने की उम्मीद है।

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