जनमंच के लिए बना दिए नियम: सरकारी नौकरी, पानी और स्वास्थ्य सुविधा की मांग नहीं उठा सकेंगे लोग

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जनमंच के लिए बना दिए नियम: सरकारी नौकरी, पानी और स्वास्थ्य सुविधा की मांग नहीं उठा सकेंगे लोग


सोलनः
हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा आम लोगों की समस्याओं को सुनने व मौके पर ही समाधान करने के लिए जनमंच कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। वहीं, प्रदेश में आगामी जनमंच का आयोजन 21 नवंबर को होना है। इससे पहले ही खबर सामने आ रही है कि प्रदेश में होने वाले जनमच कार्यक्रमों में कुछ विशेष प्रकार के आवेदनों की सुनवाई नहीं की जाएगी। 

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दरअसल, इन नए नियमों का पता उपायुक्त सोलन की तरफ से परवाणु में होने वाले जनमंच कार्यक्रम को लेकर जारी किए गए एक सूचना पोस्टर के द्वारा चल सका है। सोशल मीडिया पर यह पोस्टर वायरल होते इसे लेकर कई तरह के सवाल भी उठने लग पड़े हैं। 

विक्रमादित्य ने पूछा- यह कैसा जनमंच ? 

इस संबंध में शिमला ग्रामीण से कांग्रेस विधायक विक्रमादित्य ने सूचना को अपने सोशल मीडिया पेज पर पोस्ट कर लिखा कि यह कैसा जनमंच है, जहां लोग अपनी आवाज नहीं उठा सकते।  

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उपायुक्त सोलन के निर्देशों में विशेष तौर पर उल्लेख किया गया है कि जनमंच में स्थानांतरण, सरकारी नौकरी की मांग, न्यायालय के मामले, पानी, स्वास्थ्य केंद्र आदि के लिए नई योजनाओं की मांग जो मानदंडों पर आधारित हैं और जिसमें बजटीय आश्रय की आवश्यकता है और लोकार्पण से संबंधित मामले नहीं उठाए जा सकते हैं।

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इस सूचना पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए जिला सोलन कांग्रेस अध्यक्ष शिव कुमार का कहना है कि जनमंच कार्यक्रम केवल मंत्रियों की ओर से अधिकारियों और कर्मचारियों पर रौब झाड़ने के लिए आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब आम आदमी इसमें कोई मांग रख ही नहीं सकता तो जनता को बेवकूफ क्यों बनाया जा रहा है। 

क्या बोलीं उपायुक्तः 

उपायुक्त सोलन कृतिका कुलहरी का कहना है कि यह सूचना जनमंच को लेकर जारी सरकार के दिशा-निर्देश के मुताबिक ही प्रकाशित की गई है। जनमंच का मूल उद्देश्य समस्या का निवारण है न कि इसमें किसी तरह मांग की जा सकती है। लोग अपनी बात रख सकते हैं। कोई भी मसला इसके अनुरूप आता है तो उसे सरकार तक पहुंचाया जाएगा।

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