हिमाचल: जिप. सदस्य कविता की मौत मामले में नए खुलासे, इस वजह से था मानसिक दबाव!

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हिमाचल: जिप. सदस्य कविता की मौत मामले में नए खुलासे, इस वजह से था मानसिक दबाव!


शिमला।
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के अंतर्गत आते समरहिल इलाके के जंगल में फंदे से लटकी मिली 26 वर्षीय जिला परिषद सदस्य कविता कंटू की मौत के मामले में एक के बाद एक रोचक ट्विस्ट आ रहे हैं। इसकी वजह से यह मामला लगातार उलझता चला जा रहा है। 

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मौत के मामले पर पुलिस जांच जारी है। इस बीच पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि प्रारंभिक जांच में ये आत्महत्या का ही मामला नजर आ रहा है। मृतका के शरीर पर किसी तरह की चोट के निशान नहीं है और न ही किसी तरह की मारपीट का निशान है। 

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शरीर पर कोई ऐसे निशान भी नहीं हैं, जिससे ये पता चल सके कि मौत से पहले स्ट्रगल किया हो। हालांकि गर्दन की हड्डी टूटी हुई थी, मुंह से लार निकली हुई थी और जीभ दांतों से कटी हुई नजर आई। प्रथम दृष्टया ऐसी परिस्थति आत्महत्या के बाद की होती है। 

कविता मानसिक दबाव में थीं

पुलिस जांच में ये भी सामने आया है कि कविता किसी मानसिक दबाव में भी थी। जिला परिषद सदस्य बनने के बाद लोगों के काम दबाव बना हुआ था, दूसरी तरफ पढ़ाई को लेकर भी थोड़ी परेशान थी। कविता एक होनहार छात्रा थी, यूजीटी नेट की परीक्षा पास कर चुकी है, इतिहास विभाग में एमफिल कर चुकी थी। इसके अलावा कॉलेज कैडर की परीक्षा की तैयारी के साथ साथ पीएचडी के एंट्रेंस टेस्ट की भी तैयारी कर रही थी। 

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तय हो चुकी थी शादी- हाल ही में खरीदी थी कार 

बतौर रिपोर्ट्स, कविता ने चंद रोज पहले ही नई कार खरीदी थी। उसकी शादी भी तय हो चुकी थी। कविता एचपीयू से पीएचडी कर रही थी। कविता की साथी छात्राओं ने भी बताया कि वह मानसिक रूप से परेशान नहीं लगती थी। काफी खुशमिजाज थी। वहीं, जांच के दौरान भी निजी जिंदगी में किसी तरह की पेरशानी की अब तक कोई बात सामने नहीं आई है। 

कविता के कमरे की दो चाबियां थीं

पुलिस जांच में ये भी पता चला है कि जिस किराए के कमरे में वो रहती थी, उस कमरे की दो चाबियां थी। एक चाबी उसके पास रहती थी और दूसरी उसकी सहेली के पास। ये भी पता चला है कि वारदात के दिन पहले कविता ने शाम को अंधेरा होने का इंतजार किया। अंधेरा होने के बाद कमरे में ताला लगाकर निकल गई। 

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