हिमाचल हाईकोर्ट ने क्लॉज-18 के तहत मल्टी टास्क वर्कर की भर्ती पर लगाई रोक

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हिमाचल हाईकोर्ट ने क्लॉज-18 के तहत मल्टी टास्क वर्कर की भर्ती पर लगाई रोक


शिमलाः
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मल्टी टास्क वर्कर पॉलिसी 2020 के अंतर्गत होने वाली भर्ती में शिक्षा विभाग को आदेश दिए हैं कि वे क्लॉज 18 के तहत अभ्यर्थियों को नियुक्ति ना दे। हालांकि, कोर्ट का कहना है कि विभाग क्लॉस 7 के तहत भर्ती करने के लिए स्वतंत्र है। 

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बता दें कि प्रदेश में आठ हजार मल्टी टास्क वर्कर्स की भर्ती होनी है। जिनमें से 4 हजार पद आयोग द्वारा भर्ती निकालकर भरे जाएंगे जबकि अन्य 4 हजार मुख्यमंत्री की अनुशंसा पर भरे जाएंगे, जिनके लिए या तो उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा या मुख्यमंत्री सीधा अभ्यर्थियों की नियुक्ति कर सकते हैं। 

अपने चहेतों के लिए बनाया है क्लॉज-

ऐसे में एक प्रार्थी ने इस भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कोर्ट में याचिका दायर करते हुए सरकार पर आरोप लगाया है कि उन्होंने अपने चहेतों को नौकरी दिलाने के लिए ये क्लॉज रखा है।  इसके तहत सीएम किसी को भी पार्ट टाइम मल्टी टास्क वर्कर नियुक्त कर सकते हैं। आरोप यह भी है कि इस क्लॉज के तहत अन्य उम्मीदवारों को नौकरी पाने के लिए साक्षात्कार में हिस्सा लेने का मौका नहीं मिलता। 

हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब-

प्रार्थी की याचिका पर हाईकोर्ट ने जिला मंडी में स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला सुमना शिक्षा खंड बगस्याड़ तहसील चच्योट में होने वाली अंशकालिक मल्टी टास्क वर्कर की भती के लिए क्लॉज-18 के तहत नियुक्ति ना करने के आदेश जारी किए हैं। 

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इस संबंध में न्यायाधीश सबीना व न्यायाधीश ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने प्रथम दृष्टया प्रार्थी की दलीलों से सहमति जताते हुए संबंधित स्कूल में क्लॉज-18 के तहत मल्टी टास्क वर्कर की भर्ती पर रोक लगाने के आदेश दिए साथ ही सरकार से जवाब मांगा है। 

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गौरतलब है कि इससे पहले भी एक बार कोर्ट ने पार्ट टाइम वर्कर पॉलिसी का क्लॉज-12 निरस्त किया था। कोर्ट ने सीएम की ऐसी शक्तियों को भेदभावपूर्ण व मनमाना ठहराते हुए उसे खारिज किया था। वहीं, अब सरकार ने उसी तरह की शक्तियां नई पॉलिसी बनाकर मुख्यमंत्री को दे दी है, जो ना केवल गैर-कानूनी है बल्कि कोर्ट के आदेशों की अवमानना भी है।

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