जयराम सरकार फिर लेने जा रही है एक हजार करोड़ का कर्ज, 3 साल में ले चुके हैं 16000 करोड़

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जयराम सरकार फिर लेने जा रही है एक हजार करोड़ का कर्ज, 3 साल में ले चुके हैं 16000 करोड़


शिमला। हिमाचल प्रदेश की जयराम सरकार एक बार फिर से कर्ज की गंगा को और अधिक गहरा करने जा रही है। खबर है कि 63 हजार करोड़ के कर्ज में डूबे हिमाचल प्रदेश के ऊपर एक हजार करोड़ का अतरिक्त भार बढ़ने वाला है। 

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दरअसल, प्रदेश सरकार ने 500-500 करोड़ के दो कर्ज लेने के लिए केंद्र के पास आवेदन किया था। अब मंजूरी मिलने के बाद इस संबंध में राज्य सरकार की तरफ से अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। इसमें बताया गया है कि कर्ज की इस राशि को सरकार को 10 और 12 सालों के बीच लौटाना होगा।

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केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद राज्य सरकार ने 500-500 करोड़ के दो कर्ज लेने की अधिसूचना जारी की है। कर्ज की इस राशि को सरकार को 10 और 12 सालों के बीच लौटाना होगा। वहीं, इस नए कर्ज की इस राशि के साथ प्रदेश के खजाने पर कर्ज का कुल बोझ बढ़कर करीब 64 हजार करोड़ हो जाएगा।

सरकार ने खुद दिया था कर्ज का ब्यौरा 

हाल ही में हुए विधानसभा सत्र के दौरान प्रदेश सरकार की तरफ से सदन में बताया गया था कि बीते तीन सालों में सरकार ने 16 हजार करोड़ से अधिक के ऋण लिए हैं। इस मसले पर सरकार का कहना था कि प्रदेश के आर्थिक साधन सीमित हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद कर्मचारियों को छठे पंजाब वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत नए वेतन मान देना सरकार की बाध्यता है। 

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इसके साथ ही महंगाई भत्ते की क़िस्त का अतिरिक्त बोझ भी खजाने पर पड़ा है। नए वेतन मान देने के बाद प्रदेश के बजट का 50 फीसद कर्मचारियों के वेतन और भत्तों के साथ साथ रिटायर कर्मचारियों के पेंशन के भुगतान पर होगा।

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