'साहब मुझे टीबी है भी नहीं और अस्पताल वाले दवा दे रहे, मना करने पर पुलिस केस की धमकी'

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'साहब मुझे टीबी है भी नहीं और अस्पताल वाले दवा दे रहे, मना करने पर पुलिस केस की धमकी'


कांगड़ाः
हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग की एक और बड़ी लापरवाही सामने आई है। मिली जानकारी के मुताबिक कांगड़ा जिले स्थित सिविल अस्पताल ज्वालामुखी प्रशासन द्वारा पिछले दो सालों से एक स्वस्थ्य व्यक्ति को टीबी मरीजों की सूची में डाला गया है। जबकि उक्त शख्स को टीबी है भी नहीं बावजूद इसके उसका नाम अस्पताल प्रबंधन द्वारा लिस्ट से नहीं हटाया गया है। 

रिपोर्ट आई नेगेटिव मेसेज में बताया टीबी मरीज-

बता दें कि बीते साल सितंबर 2019 को खांसी जुकाम की दवा लेने के लिए हडोली निवासी राजेश कुमार अस्पताल गए थे। इस दौरान चिकित्सकों के कहने पर उसने अपना टीबी टेस्ट करवाया, जिसकी रिपोर्ट नेगेटिव आई। वहीं, चेकअप करवाने के बाद जैसे ही राजेश घर पहुंचा तो उसे फोन पर मेसेज आया कि वह टीबी का मरीज है और उसे दवा का कोर्स पूरा करना होगा।                                                  

इस पर जब राजेश ने अपनी रिपोर्ट के आधार पर दवाई लेने से इंकार किया तो अस्पताल प्रबंधन की ओर से उसे पुलिस में शिकायत दर्ज करवाने की बात कही गई। इसके बाद राजेश डयूटी पर से छुट्टी लेकर सीधा अस्पताल में अपनी रिपोर्ट दिखाने पहुंचे। जहां रिपोर्ट के आधार पर प्रबंधन ने अपने गलती मानी और उनका नाम टीबी मरीजों की सूची से हटाने का आश्वासन दिया। 

परंतु दो साल बीतने के बाद भी उनका नाम इस सूची से हटाया नहीं गया है। आज भी रिकार्डस में राजेश टीबी मरीज हैं। अपना नाम लिस्ट से हटाने को लेकर राजेश ने प्रबंधन से गुहार तक लगाई परंतु अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। 

जानें क्या बोले कार्यकारी खंड चिकित्सा अधिकारी

वहीं, इस संबंध में जानकारी देते हुए कार्यकारी खंड चिकित्सा अधिकारी ज्वालामुखी डॉ. पवन शर्मा ने बताया कि यह मामला दो साल से चल रहा है। टीबी जांच के बाद रिकार्ड अपडेट करते समय गलती हुई है। उन्होंने बताया कि इस मामले से संबंधित कर्मचारियों को इसे ठीक करने के लिए तीन माह पहले कहा था। उनका कहना है कि रिकार्ड से नाम क्यों नहीं हटाया जा रहा है, इस बाबत जवाब तलबी की जाएगी।

इस संबंध में जब सीएमओ कांगडा डॉ. गुरदर्शन से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उनके पास इस तरह की कोई शिकायत अभी तक नहीं आई है। अगर ऐसा है तो ये चिंताजनक है। मामले के संबंध में अस्पताल प्रशासन से रिपोर्ट ली जाएगी।

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