हिमाचल कांग्रेस: विधानसभा से पहले ही बड़ी कुर्सी के लिए जुगत, हर एक हाथ दूसरे को खींचने में लगा

Ticker

6/recent/ticker-posts

adv

हिमाचल कांग्रेस: विधानसभा से पहले ही बड़ी कुर्सी के लिए जुगत, हर एक हाथ दूसरे को खींचने में लगा


शिमला।
साथी हाथ बढ़ाना एक अकेला थक जाएगाा मिलकर बोझ उठाना, नया दौर फिल्म का यह गीत हर आदमी को जोडऩे के लिए हाथ बढ़ाने के लिए प्रेरित करता है। हाथ से हाथ मिले तो जोर दोगुना बढ़ जाता है, लेकिन हिमाचल कांग्रेस में इन दिनों एक हाथ दूसरे हाथ को खींचने में लगा हुआ है। 

हिमाचल में भाजपा नीत प्रदेश सरकार सत्ता के चार साल पूरे होने पर अपनी उपलब्धियां गिना रही है तो दूसरी तरफ कांग्रेस के नेता भी अपनी-अपनी पीठ ठोंकने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। बहाना चाहे कोई भी हो, लेकिन सभी का लक्ष्य सिर्फ एक ही है। इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद बड़ी कुर्सी के लिए हर किसी का मन कुलांचे मार रहा है।

मुकेश के साथ हैं कई बड़े हाथ 

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मुकेश अग्निहोत्री को चार साल बतौर नेता प्रतिपक्ष बने रहने पर सबसे पहले दिवंगत कांग्रेस नेता व पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के विधायक पुत्र विक्रमादित्य ने फेसबुक के जरिये बधाई देते हुए कहा कि मुकेश अग्निहोत्री ने इस काम पर बाखूबी अंजाम दिया है। 

सदन के बाहर व अंदर सरकार को घेरने के लिए खूब प्रयास किए। जनहित के मुद्दों की लड़ाई सदन से लेकर सड़क तक लड़ी। इसके बाद बड़सर के विधायक इंद्रदत्त लखनपाल व अन्य कई कांग्रेस नेताओं ने इस तरह ही मुकेश की तारीफों के पुल बांधना शुरू कर दिए।

पता चला है कि कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजीव शुक्ला के भी बधाई संदेश आए हैं। इंटरनेट मीडिया पर इस तरह की बधाइयों का सिलसिला आगे बढ़ा तो दूर रहने वाले कांग्रेसियों को भी लगा कि लगे हाथ हम भी बधाई दे देते हैं न जाने कल को क्या होगा। 

कुलदीप राठौर के भी कांग्रेस के हाथ किए मजबूत 

चुनावी वर्ष है इसलिए हर कोई इस उम्मीद में है न जाने कौन आगे आ जाए। अभी मुकेश को बधाइयों का सिलसिला थमा नहीं था कि कांग्रेस के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप राठौर के तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के बधाई संदेश चल पड़े। उन्होंने भी पिछले साल हुए चार उपचुनाव की जीत को संगठन से जोड़ते हुए अपने हाथ मजबूत किए।

इसी बीच कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष व नादौन के विधायक सुखविंदर सिंह सुक्खू के फेसबुक पेज पर एक संदेश आया कि मैं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद या किसी अन्य पद की दौड़ में नहीं हूं। कुछ स्वार्थी लोग इस तरह का दुष्प्रचार कर रहे हैं। कई लोग इस तरह की अफवाह फैला रहे हैं कि संगठन में कोई बड़ा पद लेना चाहता हूं।, सुक्खू के इस संदेश के कई मायने हैं।

दरअसल चार उपचुनाव में जीत के बाद कई कांग्रेस नेता अपने आप को कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के लिए प्रोजेक्ट कर रहे हैं। यही वजह है कि प्रदेश में पहली बार नेता प्रतिपक्ष के चार साल पूरा होने पर इस तरह के बधाई संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं।

उधर मिशन 23 नेताओं में शुमार व कभी दिल्ली दरबार के खास माने जाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा की सक्रियता को भी राजनीतिक गलियारों में कई तरह से लिया जा रहा है। हाल ही में शिमला ग्रामीण हलके के लिए 25 लाख की राशि देने वाले आनंद शर्मा हिमाचल की राजनीति में कितनी रुचि रखते हैं, यह तो कहना कठिन है लेकिन वह भी शतरंज के मझे हुए खिलाड़ी हैं।

आशा कुमारी को भी है आशा 

उधर, डलहौजी की विधायक आशा कुमारी भी दिल्ली दरबार में खासी पैठ रखती हैं। अभी तक उनकी ओर से इस तरह की कोई महत्वकांक्षा सामने तो नहीं आई है, लेकिन कांग्रेस नेताओं की इस तरह अपनी पीठ खुजलाने की वजह से हाथ को मजबूत करने के बजाए दो-दो हाथ करने की नौबत न आ जाए। \

कुछ दिन पहले धर्मशाला में कांग्रेस नेता ने भी खिचड़ी के बहाने कुछ नेताओं को जुटाया था, लेकिन अलग-अलग खिचड़ी पकाने से कहीं  स्वाद न बिगड़ जाए। प्रदेश में विधानसभा के लिए अभी करीब नौ माह का समय है ऐसे में कांग्रेस नेता इस तरह अपनी-अपनी ढफली बजाते रहे तो सुर ताल मिलना कठिन हो जाएगा। भाजपा से लड़ने की बजाए कुर्सी के लिए अभी जुगत भिड़ाने की जुगत कहीं भारी न पड़ जाए।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ