हिमाचल के शूरवीर: देश के लिए तीन युद्ध लड़ने वाले कैप्टन ज्ञान चंद का देहांत

Ticker

6/recent/ticker-posts

adv

हिमाचल के शूरवीर: देश के लिए तीन युद्ध लड़ने वाले कैप्टन ज्ञान चंद का देहांत


मंडी।
देश की सरहद की रक्षा करते हुए तीन युद्धों में भाग लेने वाले हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सरकाघाट के हटली क्षेत्र के कैप्टन ज्ञानचंद (84) का शनिवार दोपहर हृदय गति रुकने से देहांत हो गया। 

मिली जानकारी के अनुसार शनिवार दोपहर 2:00 बजे वह बल्द्वाड़ा में अपने बेटे को स्कूटी पर खाना देने गए थे।  वापसी पर जैसे ही अपने घर के पास सड़क पर स्कूटी स्टैंड पर लगाने लगे, उसी दौरान उन्हें हार्ट अटैक आ गया और वह वहीं गिर गए। करीब 10 मिनट बाद लोगों ने उन्हें सड़क पर पड़े देखा। 

1989 में हुए थे रिटायर 

उन्हें सीएचसी बल्द्वाड़ा में लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बता दें कि बल्द्वाड़ा के कारनी गांव निवासी कैप्टन ज्ञानचंद ने 1962,1965 व 1971 के युद्ध में भाग लिया था। भारतीय सेना की 18 डोगरा रेजीमेंट में 32 वर्ष सेवाएं देने के बाद वर्ष 1989 में वह रिटायर हुए थे। रिटायर होने के बाद भी वह पूर्व सैनिकों के कल्याण कार्यों में पूरी तरह सक्रिय थे। 

इसके अलावा मानद कमीशन अफसर कैप्टन ज्ञानचंद को देश के महामहिम राष्ट्रपति की ओर से भी सराहनीय सेवाओं के लिए सामान भी दिया गया था।  वह पूर्व सैनिक कल्याण एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष पद पर भी कार्य कर रहे थे। ज्ञानचंद  क्षेत्र भर में भारत-पाक के साथ तीन युद्धों में भाग लेने के बाद लोगों के रोल मॉडल थे।

कैप्टन जान चंद को बल्द्वाड़ा श्मशानघाट में भारी संख्या में पूर्व सैनिकों व स्थानीय जनता ने अंतिम विदाई दी। उनके निधन पर सरकाघाट के कई नेताओं समेत प्रबुद्ध जनों ने दुख प्रकट किया। 

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ