हिमाचली महिला का साहसी फैसला: ब्रेन डेड पति के अंग किये दान, 6 लोगों की मिला नया जीवन!

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हिमाचली महिला का साहसी फैसला: ब्रेन डेड पति के अंग किये दान, 6 लोगों की मिला नया जीवन!


चंडीगढ़।
पीजीआई चंडीगढ़ ने एक बार फिर मिसाल कायम की और 6 लोगों को नया जीवन दान देने में सफलता पाई। हिमाचल के एक 50 वर्षीय व्यक्ति की दुर्घटना में सिर में चोट लग गई थी। गंभीर हालत में उसे पीजीआई चंडीगढ़ इलाज के लिए लाया गया। काफी दिन इलाज चलने के बाद भी उस व्यक्ति की हालत में सुधार नहीं आया। एक फरवरी की शाम को यहां पीजीआई में ब्रेन डेथ सर्टिफिकेशन कमेटी की दो बैठकों के बाद ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। 

दिल गया दिल्ली-तो फेफड़ा चेन्नई 

दिल को दिल्ली, फेफड़े चेन्नई और दो लोगों की पीजीआई में जान बचाई गई। इसके अलावा पीजीआई में प्राप्त कॉर्निया को प्रत्यारोपण के बाद दो कॉर्नियल नेत्रहीन रोगियों की दृष्टि बहाल कर दी गई।

महिला बोली- हमने इसे अपनी शांति और सांत्वना के लिए किया

पीजीआई में प्रत्यारोपण समन्वयक ने मृतक के परिवार से अनुरोध किया कि क्या वे अंग दान पर विचार कर सकते हैं। दृढ़ और बहादुर हृदय वाले परिवार ने अपार धैर्य दिखाया और अंगदान के लिए सहमति व्यक्त की। ब्रेन डेथ व्यक्ति की पत्नी ने हामी भर दी, लेकिन अपनी पहचान गुप्त रखने की इच्छा जताई। इस पर पीजीआई के अधिकारी सहमत हो गए। 

बहादुर पत्नी ने कहा, 'यह ऐसी चीज है जिससे किसी भी परिवार को नहीं गुजरना चाहिए। हमने अंगदान के लिए हां कहा क्योंकि हम जानते थे कि यह किसी और की मदद कर सकता है और उन्हें उस दिल के दर्द से गुजरने की जरूरत नहीं है जिससे हम गुजर रहे हैं।' हमने इसे अपनी शांति और सांत्वना के लिए किया है।

पीजीआई के मेडिकल सुपरिटेंडेंट कम नोडल आफिसर रोटो प्रो विपिन कौशल ने बताया कि  परिवार के फैसले का सम्मान करते हुए, हमने दिल, फेफड़े, गुर्दे और कॉर्निया को सुरक्षित किया। अंग उपलब्ध हो जाने के बाद, हर कोई तेजी से हरकत में आ गया और यह सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

बीएसफ के 44 वर्षीय जवान के शरीर में लगा दिल 

प्रो कौशल ने आगे कहा, चूंकि पीजीआईएमईआर में क्रॉस-मैचिंग ने दिल और फेफड़ों के लिए कोई मिलान प्राप्तकर्ता नहीं मिला, इसलिए हमने मिलान प्राप्तकर्ताओं के विकल्पों का पता लगाने के लिए तुरंत अन्य प्रत्यारोपण अस्पतालों से संपर्क किया। 

अंत में दिल्ली एम्स में भर्ती बीएसफ के 44 वर्षीय जवान के शरीर में दिल प्रत्यारोपित किया गया। एक अन्य प्राप्तकर्ता के लिए फेफड़े आवंटित किए गए। चेन्नई के एमजीएम हेल्थकेयर में एक 29 वर्षीय युवक को फेफड़े देकर उसकी जान बचाई गई।

दो ग्रीन कॉरिडोर बनाकर पूरा किया मिशन 

पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो सुरजीत सिंह ने अंगदाता परिवार के प्रति पीजीआई की ओर से आभार जताया। उन्होंने कहा कि अंगदाता परिवार फैसला नहीं लेता तो 6 लोगों को नया जीवन नहीं मिला। प्रो कौशल ने बताया कि 2 फरवरी शाम को दो ग्रीन कॉरिडोर बनाए गए। 

पीजीआई से तकनीकी हवाई अड्डे चंडीगढ़ तक पहुंचाया। यहां से दिल दिल्ली के लिए भेजा गया। इसी तरह दूसरा ग्रीन कॉरिडोर बनाकर फेफड़े चेन्नई पहुंचाए गए। 

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