हिमाचल BJP से निकाले गए पूर्व विधायक की पत्नी लड़ेंगी चुनाव, किसी भी पार्टी से नहीं जुड़ी हैं

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हिमाचल BJP से निकाले गए पूर्व विधायक की पत्नी लड़ेंगी चुनाव, किसी भी पार्टी से नहीं जुड़ी हैं


सिरमौरः
हिमाचल प्रदेश में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में प्रदेश के भीतर राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ गई हैं। इस सब के बीच सिरमौर जिले के संगडाह उपमंडल से जुड़ी हुई एक बड़ी खबर सामने आई है। मिली जानकारी के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी में पूर्व विधायक रहे हृदयराम चौहान की पत्नी सत्या चौहान ने इस बार रेणुकाजी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने का मन बनाया है। 

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नहीं ली है किसी भी पार्टी की सदस्यता

बता दें कि इससे पहले उनके पति यहां से तीन बार चुनाव लड़ चुके हैं। वहीं, अब इस बार हृदयराम चौहान ने चुनाव न लड़ने का निर्णय लिया है। ऐसे में उनकी पत्नी सत्या चौहान SC आरक्षित रेणुकाजी विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी के तौर पर उतरेंगी। हालांकि, अभी तक उन्होंने किसी भी पार्टी की सदस्यता ग्रहण नहीं की है। अब यह देखना अहम होगा कि वह किसी पार्टी को ज्वाइन करती हैं या फिर अपने पति की तरह ही निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरती हैं।

उप चुनाव में जीते थे पति फिर अगली बार हार गए थे

वर्तमान में सत्या चौहान विकास खंड संगड़ाह की दिउड़ी-खड़ाह पंचायत की प्रधान है। इस संबंध में सत्या चौहान ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने अभी तक किसी भी पार्टी की सदस्यता ग्रहण नहीं की है तथा कुछ राजनितिक पार्टियों के नेता उनके संपर्क में हैं। जो भी पार्टी उन्हें अपनी सदस्यता प्रदान करेगी वह उसकी उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान मे उतरेगी।

बता दें कि सत्या चौहान के पति हृदय राम ने 2011 के उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी विनय कुमार को 3200 से अधिक मतों से हराया था तथा उस दौरान सत्ताधारी दल बीजेपी के कद्दावर नेता डॉ राजीव बिंदल, महेंद्र सिंह ठाकुर व सुखराम चौधरी आदि ने उनके प्रचार की कमान संभाली थी। यहां तक की संगड़ाह में एसडीएम ऑफिस भी उन्ही के कार्यालय में खुला था। 

पार्टी विरोधी होने पर दिखाया था बाहर का रास्ता

वर्ष 2012 में वह कांग्रेस उम्मीदवार विनय कुमार से मात्र 658 मतों से चुनाव हार गए, वर्ष 2017 के उन्होंने  निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में करीब 12,500 वोट हासिल कर तीसरा स्थान प्राप्त किया। इस बीच पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के कारण उन्हे बाहर का रास्ता दिखाया गया था, परंतु हाल ही में हुए लोकसभा इलेक्शन से पहले उन्हें फिर पार्टी में वापिस लिया गया।  

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