HPBOSE में गजब खेल: 'पापा' पेपर सेट कर रहे- 'बेटा' परीक्षा देगा; उठ रहे सवाल

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HPBOSE में गजब खेल: 'पापा' पेपर सेट कर रहे- 'बेटा' परीक्षा देगा; उठ रहे सवाल


धर्मशालाः
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला द्वारा आयोजित बारहवीं कक्षा के बोर्ड एग्जामस में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। मिली जानकारी के मुताबिक स्कूल बोर्ड के तहत एग्जाम दे रहे एक परीक्षार्थी के पिता बोर्ड में पेपर सेटिंग ब्रांच में सेवाएं दे रहे हैं। यहां तक की उक्त कर्मचारी बोर्ड में बड़े अधिकारी का पीए भी है। 

ऐसे में शिक्षाविदों की ओर से बोर्ड की कार्यप्रणाली तथा विश्वसनियता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि अगर परीक्षा और गोपनीय ब्रांच में किसी परीक्षार्थी के माता-पिता सेवाएं दे रहे हों तो यह गलत है। 

बोर्ड के अधिकारी ने कबूली बात

उनका कहना है कि अगर स्कूल बोर्ड में इस तरह के सर्विस रुल नहीं है तो ऐसे रुल शीघ्र बनाए जाने चाहिए। उघर, बोर्ड के ही एक अधिकारी ने ये कबूला है कि संबंधित कर्मचारी का बेटा स्कूल शिक्षा बोर्ड के तहत बारहवीं की परीक्षा दे रहा है। 

सर्विस कंडक्ट रुलः नहीं ले सकते हिस्सा 

वहीं, बात करें स्कूल शिक्षा बोर्ड नियम तथा सर्विस कंडक्ट रुल की तो इसके तहत जिल माता-पिता का बेटा, बेटा या कोई दूसरा ब्लड रिलेशन नजदीकी रिश्तेदार हो, जो बोर्ड की परीक्षा में हिस्सा ले रहा हो। ऐसे में उसे स्कूल शिक्षा बोर्ड की गोपनीय शाखा, परीक्षा शाखा, प्रश्नपत्र सेटिंग शाखा, रिजल्ट शाखा और संबंधित स्कूल में फ्लाइंग स्कवायड के पद पर नियुक्ति नहीं दी जा सकती। यहां तक की इस संबंध में बोर्ड की ओर से कर्मचारियों से अंडरटेकिंग ली जाती है कि उनके परिवार का कोई सदस्य परीक्षा नहीं दे रहा। 

जानें क्या बोले बोर्ड के चेयरमैन

इस संबंध में जानकारी देते हुए स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला के चेयरमैन प्रो. सुरेश कुमार सोनी ने बताया कि मामला ध्यान में नहीं है। अगर ऐसा है तो मामले की जांच की जाएगी। वैसे भी अगर बोर्ड परीक्षा देने वाले विद्यार्थी के अभिभावक स्कूल शिक्षा बोर्ड की परीक्षा शाखा में सेवाएं दे रहे हों तो कोई आपत्ति नहीं हो सकती। 

सचिव ने कही ये बात

जबकि दूसरी ओर हिप्र स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला की सचिव डॉ. मधु चौधरी ने जानकारी साक्षा करते हुए बताया कि सेक्शन की ड्यूटी पेपर सेटिंग ब्रांच में लगी है, लेकिन पेपर सेट करने का काम एक्सपर्ट का होता है। मेरा बेटा या बेटी अगर परीक्षा दे रहे हों तो मैं सचिव के पद पर नहीं रह सकती, ऐसा नियम है। अगर सभी कर्मचारियों के लिए यह रूल लागू करने लगें तो बोर्ड का काम चलाना मुश्किल हो जाएगा।

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