जयराम सरकार ने कर्मचारियों को दिया झटका: अब नए वित्त वर्ष में मिलेगा DA का एरियर

Ticker

6/recent/ticker-posts

adv

जयराम सरकार ने कर्मचारियों को दिया झटका: अब नए वित्त वर्ष में मिलेगा DA का एरियर


शिमला।
हिमाचल प्रदेश की जयराम सरकार द्वारा हर साल पेश किए जाने वाले बजट का एक अच्छा ख़ासा हिस्सा कर्मचारियों पर खर्च कर दिया जाता है। ऐसे में सरकार के पास सूबे के विकास के पर्याप्त मात्रा में फंड नहीं बच पाता है। इसके बावजूद भी मौजूदा जयराम सरकार चुनावी साल में सभी कर्मचारी वर्गों को प्रसन्न करने के लिए हर तरह के प्रयास कर रही है। 

इस सब के बीच ताजा अपडेट सामने आई है कि जयराम सरकार द्वारा सूबे के सरकारी कर्मचारियों को बड़ा झटका दे दिया गया है. दरअसल, पहले जहां प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों से वादा किया था कि मौजूदा वित्त वर्ष के अंतिम माह मार्च में महंगाई भत्ते (डीए) के एरियर का भुगतान कर दिया जाएगा। जुलाई 2021 से जनवरी 2022 तक देय डीए कर्मियों की भविष्य निधि में जमा किया जाना था। 

वहीं, अभी तक वित्त विभाग की ओर से इस ओर कदम नहीं उठाया गया है। ऐसे में अब माना जा रहा है कि प्रदेश में कर्मचारियों को नए वित्त वर्ष में डीए का एरियर मिलेगा। गौरतलब है कि संशोधित वेतनमान के तहत कर्मचारियों को जनवरी से बढ़े हुए वेतन के साथ डीए मिलना शुरू हो गया है। 

एक अनुमान के अनुसार सरकार को बकाया डीए देने के लिए करीब 250 करोड़ रुपए चाहिए। कई विभागों की तरफ से राज्य कोषागार में संपर्क किया गया तो सामने आया कि डीए के संदर्भ में एरियर के लिए खाता नहीं खोला गया है। जबकि, सरकार की तरफ से घोषणा की गई थी कि पुराने वेतनमान के तहत बनने वाला डीए 31 जनवरी तक कर्मचारी भविष्य निधि में समायोजित किया जाएगा।

31 मार्च तक चुन सकेंगे तीसरा विकल्प

कर्मचारियों की मांग को देखते हुए सरकार ने नए वेतनमान का निर्धारण करने के लिए जनवरी में तीसरा विकल्प चुनने का विकल्प दिया था। तीसरे विकल्प में 15 प्रतिशत वेतनवृद्धि को शामिल किया गया था। इससे पहले सरकार की ओर से 2.25 व 2.59 गुणक दिया गया था। 

वहीं, कर्मचारी वर्ग इन विकल्पों से खुश नहीं थे। वे पंजाब सरकार की तरह तीसरा विकल्प चाहते थे। तीसरा विकल्प चुनने की समय अवधि 31 मार्च को समाप्त हो रही है। उसके बाद वित्त विभाग की ओर से वर्ष 2016 से एरियर का निर्धारण किया जाएगा।

अधिक ब्याज दर के कारण कर्ज नहीं लिया

सरकार ने पांच दिन पहले 1400 करोड़ रुपए का कर्ज लेने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक में आवेदन किया था। अधिक ब्याज दर होने के कारण सरकार ने कर्ज लेने से हाथ पीछे खींच लिया। सरकार 5400 करोड़ रुपए का शेष कर्ज ले सकती थी। इसमें से कुछ कर्ज की राशि अगले वित्त वर्ष में प्राप्त की जा सकती है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ