हिमाचल में एक और पार्टी: रुमित ठाकुर लड़ेंगे चुनाव, सवर्णों के वोट का बंटाधार तय!

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हिमाचल में एक और पार्टी: रुमित ठाकुर लड़ेंगे चुनाव, सवर्णों के वोट का बंटाधार तय!


शिमलाः
हिमाचल प्रदेश में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने प्रस्तावित हैं। ऐसे में प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ गई हैं। वहीं, सूबे के सारे वर्ग अपनी अपनी मांगों को लेकर मौजूदा सरकार से नाराज चल रहे हैं। इस सब के बीच पंजाब में चुनाव जीतने के बाद आम आदमी पार्टी ने हिमाचल का रुख किया है। 

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त्रिकोणीय बनते मुकाबले में उभरा नया किरदार 

तो वहीं, दूसरी तरफ बीजेपी भी चार राज्यों में मिशन रिपीट करने के बाद हिमाचल पर फ़तेह पाने के लिए तैयार बैठी है। ऐसे में अब सूबे का राजनीतिक समीकरण त्रिकोणीय होता नजर आ रहा है। इस सब के बीच आज सूबे की राजनीतिक पटकथा में एक नया किरदार उभर कर सामने आया और चुनाव लड़ने का ऐलान भी कर दिया। 

मांग लेकर आए थे अपनी राजनीति साधकर लौट गए 

जी हां, हम बात कर रहे हैं देवभूमि क्षत्रिय संगठन के प्रदेशाध्यक्ष रुमित ठाकुर की। जो आज दल बल के साथ सवर्ण आयोग की मांग को लेकर शिमला आए थे। वहीं, राजधानी में पुलिस द्वारा शानदार स्वागत मिलने के बाद इन्होंने अपनी नई पार्टी बनाने का ऐलान करते हुए आगामी विधानसभा चुनावों में ताल ठोंकने की घोषणा कर दी है। 

कुछ इस तरह बिगड़ेगा समीकरण 

अब ऐसे में अगर रुमित ठाकुर चुनावों मे उतरते हैं तो इससे प्रदेश की तमाम पार्टियों के सवर्ण वोट बैंक पर काफी बुरा असर पड़ेगा। क्योंकि सभी सूबे के दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों का सवर्ण वोट बैंक में अपना-अपना हिस्सा है। वहीं, रुमित ठाकुर अगर पार्टी बनाकर चुनावी मैदान में उतरते हैं। तो सवर्ण वोटों का बंटाधार होना तय ही माना जा सकता है। 

मंडी में मिला था सबक पर कितना समझेगी सरकार 

गौरतलब है कि हाल ही में सूबे के मंडी जिले में हुए उपचुनाव में बीजेपी को सवर्ण वोटरों का अच्छा ख़ासा रोष झेलना पड़ गया था और नोट पर भारी मात्रा में वोटिंग होने के चलते बीजेपी अपने बनी बनाई सीट गंवा बैठी थी। 

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ऐसे में अब देखना होगा कि प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर अपने वादे को पूरा करते हैं या नहीं और अगर सरकार सवर्ण आयोग का गठन कर भी देते है तो क्या रुमित ठाकुर अपना यह फैसला वापस लेंगे। अब जो कुछ भी सब भविष्य के गर्भ में छिपा हुआ है। आगे-आगे देखो होता है क्या-

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