हिमाचल में भांग खेती को मिलेगा व्यावसायिक दर्जा, सरकार लेकर आ रही है स्थायी नीति

Ticker

6/recent/ticker-posts

adv

हिमाचल में भांग खेती को मिलेगा व्यावसायिक दर्जा, सरकार लेकर आ रही है स्थायी नीति

शिमला: हिमाचल प्रदेश में भांग की खेती को व्यावसायिक दर्जा देने की तैयारी चल रही है। जल्द ही इस संबंध में अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ले सकती है।

सरकार है संवेदनशील:

बता दें कि इस संबंध में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अपने कुल्लू-मलाना दौरे के दौरान कहा भी था कि भांग की खेती को लेकर प्रदेश सरकार संवेदनशील है और जल्द ही आने वाले समय में इसको लेकर स्थाई नीति बनाई जाएगी। 

हालांकि, अभी तक भांग की व्यावसायिक खेती के लिए कोई क्षेत्र चिन्हित नहीं किया गया है और न ही किसी को एनओसी दी गई है और न ही किसी कंपनी को इसके लिए अधिकृत किया गया है। 

राज्य सरकार की तरफ से भांग को व्यावसायिक खेती के रूप में मान्यता संबंधी सभी पहलुओं पर व्यापक विचार-विमर्श हो चुका है। अब सरकारी स्तर पर इस खेती के नफे-नुकसान का आकलन किया जा रहा है। साथ ही विधि विभाग भी इसकी कानूनी पेचीदगियों की पड़ताल कर रहा है।

हजारों बीघा क्षेत्र में पैदा होती है भांग:

बता दें कि राज्य में करीब 30 हजार बीघा क्षेत्र में भांग पैदा होती है, जिसे मानसून सीजन के दौरान सरकार को नष्ट करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। भांग से तैयार होने वाली चरस की हिमाचल प्रदेश से बड़े स्तर पर अवैध व्यापार होता रहा है।

नशा मुक्ति के दिशा में सरकार लगातार काम भी कर रही है। प्रदेश पुलिस की चेकिंग अभियान लगातार जारी रहती है। लेकिन इससे न भांग की खेती रुकनी है और ना ही नशे का अवैध कारोबार। 

इसका एक ही निदान है भांग की खेती को लेकर व्यावसायिक स्थायी नीति बनाई जाए और इसकी खेती से जुड़ें लोग वैध तरीके से काम कर सकें। भांग को दवा कंपनियों को बेच कर राज्य सरकार अच्छा मुनाफा भी कमा सकती है।

भांग की खेती के लाभ;

भांग का उपयोग औषधि के लिए भी प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा भांग के पौधे के रेशे से वस्त्र बनाए जा सकते हैं। इस क्षेत्र में स्टार्टअप कंपनियां रुचि दिखा सकती हैं, जिससे कपड़ों के अलावा भांग के रेशे से पर्स, चप्पल व कई अन्य चीजें बनाई जा सकती हैं।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ