सरकार की हां के बावजूद 'रुमित' ने साध ली अपनी राजनीति: इस जवान भाई के बहते खून का क्या

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सरकार की हां के बावजूद 'रुमित' ने साध ली अपनी राजनीति: इस जवान भाई के बहते खून का क्या



शिमला। हिमाचल प्रदेश में इस साल के अंत में चुनाव होने हैं। ऐसे में सूबे का राजनीतिक पारा चढ़ा हुआ है। अब ऐसे मौसम नेता और पार्टियां तो बरसाती मशरूम की तरह जगह-जगह पनपने लग पड़ी हैं। वहीं, प्रदेश के बहुत से वर्ग के लोगों में मौजूद सरकार के प्रति नाराजगी भी है। 

इस कारण सूबे में होने वाले विरोध प्रदर्शनों की तादात भी खूब बढ़ गई है। इसका ताजा उदहारण आज सूबे की राजधानी शिमला में देखने को मिला। जहां देवभूमि क्षत्रिय संगठन के प्रदेशाध्यक्ष रुमित ठाकुर आज दल बल के साथ आ धमके। 

कानून की धज्जियां उड़ाईं- ड्यूटी कर रहे जवानों को भी नहीं बक्शा 

राजधानी शिमला में DC के आदेशों पर धारा 144 लागू किए जाने के बावजूद एक तो इन लोगों ने कानून की धज्जियां उड़ाईं और तो और अपने कर्त्तव्य का निर्वहन करते हुए ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मियों से भी उलझ गए। 

पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच इस दौरान झड़प भी हुई। इस पूरी झड़प में ASP सहित चार जवान घायल हुए। आंदोलनकारियों से हुई झड़प में घायल हुए एक जवान की तस्वीर और वीडियो सुबह से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, लेकिन इसकी चर्चा कोई नहीं कर रहा। 

अपने हित के चक्कर में सबका इस्तेमाल किया

वहीं, इस पूरे संघर्ष का निष्कर्ष यह निकला कि पूर्व कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री के पोते रुमित ठाकुर ने राजनीति में उतरकर सरकार को सत्ता से बाहर फेंकने की बात कहते हुए पूरे आंदोलन को मिट्टी में मिला दिया। अब एक तरफ उनके ही संगठन के लोग रुमित के विरोध में उतर आए हैं। इन लोगों का मानना है कि रुमित ने अपना राजनीतिक स्वार्थ साधने के चक्कर में हम सबका इस्तेमाल किया है। 

सीएम ने किया था आयोग के गठन का वादा 

मौके पर मौजूद कार्यकर्ताओं ने यह तक कह दिया कि सत्ता का लालच था तो पहले बोल देते। गौरतलब है धर्मशाला में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान सूबे के सीएम जयराम ठाकुर संगठन के कार्यकर्ताओं से आयोग का गठन करने का वायदा किया था। 

वहीं, चुनावी साल होने की वजह से यह माना भी जा रहा था कि प्रदेश सरकार सूबे के सवर्ण वोट बैंक को रिझाने के लिए आयोग का गठन कर भी देगी लेकिन आज राजधानी में जो कुछ भी हुआ और अंत में रुमित ठाकुर इस तरह का ऐलान कर बैठे। 

राजनीतिक महत्वाकांक्षा के चक्कर में कमजोर किया आंदोलन 

ऐसे में कहीं ना कहीं ऐसा प्रतीत होते है कि अपने व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा को साधने के चक्कर में रुमित गुड़ का गोबर कर बैठे हैं। एक तरफ जहां उनके अपने लोग ही उनकी खिलाफत में उतर आए हैं। 

वहीं, दूसरी तरफ इस तरह का ऐलान कर रुमित ठाकुर ने खुद को सरकार के आंखों की किरकरी बना लिया है। और तो और अब इस मसले पर अब शायद कांग्रेस भी उनका साथ ना दे क्योंकि अगर यह पार्टी बनती है, तो ये लोग कांग्रेस के लिए भी मुसीबत साबित हो सकते हैं। 

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