CM फेस घोषित किए बिना चुनाव लड़ेगी कांग्रेस: सत्ती के इस बयान के क्या हैं मायने, समझें यहां

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CM फेस घोषित किए बिना चुनाव लड़ेगी कांग्रेस: सत्ती के इस बयान के क्या हैं मायने, समझें यहां


शिमला।
हिमाचल प्रदेश में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव संपन्न हो जाने हैं। ऐसे में सभी राजनीतिक पार्टियां अपने आंतरिक मतभेदों को भुलाकर चुनावी रणनीति बनाने में जुटी हुई हैं। सूबे की सतासीन पार्टी बीजेपी जहां पूरे दमखम के साथ मिशन रिपीट करने की बात दुहरा रही है। वहीं, तीसरा मोर्चा बनकर सूबे की राजनीति में नया अध्याय जोड़ने के लिए आम आदमी पार्टी की तरफ से भी हाथ पाँव मारे जा रहे हैं। 

कांग्रेस के भीतरखाने हो रही भारी गुटबाजी 

इस बीच रिवाज के अनुसार 5 साल में सत्ता परिवर्तन की ख्वाहिश लिए कांग्रेस पार्टी की सक्रियता थोड़ी कमतर ही मालूम पड़ रही है। कई सारे गुटों में बंटी हिमाचल कांग्रेस में कई सारे नेता सीएम बनने का ख़्वाब सजाए बैठे हैं, लेकिन खुलकर सामने नहीं आ रहे। पर्दे के पीछे से हिमाचल में खेले जा रहे राजनीतिक गेम में एक प्रमुख नाम है हिमाचल कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और विधायक सतपाल सिंह सत्ती का। 

आमतौर पर दिवंगत पूर्व सीएम राजा वीरभद्र सिंह के धुर विरोधी माने जाने वाले सत्ती के पास हिमाचल कांग्रेस के मौजूदा विधायकों में से लगभग आधे का समर्थन है और वे समय-समय खुद को हिमाचल कांग्रेस का प्रमुख चेहरा बताते हुए अपनी दावेदारी भी जाता चुके हैं। वहीँ, अब इस चुनावी माहौल में सत्ती का एक बड़ा बयान सामने आया है, जो कि कई तरह के अनसुलझे इशारे कर रहा है। 

यहां जानें क्या बोले सत्ती 

अपने ताजा बयान में सत्ती ने कहा है की हिमाचल में कांग्रेस पार्टी संगठित होकर विधानसभा चुनाव लड़ेगी और चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित नहीं किया जाएगा। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा है कि स्वच्छ छवि वाले युवाओं को विधानसभा चुनाव में पार्टी की तरफ से टिकट दिया जाएगा। बकौल सुक्खू, संगठन में परिवर्तन निरंतर प्रक्रिया है।

समझें क्या है सुक्खू के इस बयान के मायने 

सुक्खू द्वारा दिया गया यह बयान कहीं ना कहीं यह बात सपष्ट कर देता है कि चुनाव होने तक वे अपनी तरफ से सीएम पद के लिए दावेदारी नहीं पेश करने वाले हैं। इसका सीधा सा कारण है कि हिमाचल कांग्रेस में सुक्खू के अलावा मुकेश अग्निहोत्री, आशा कुमारी, कुलदीप राठौर, प्रतिभा सिंह, विक्रमादित्य सिंह सरीखे कई सारे नाम हैं, जो कहीं ना कहीं बहुमत मिलने पर सीएम बनने का दावा ठोंक सकते हैं। 

ऐसे में जो कलह चुनाव जीतने के बाद होनी चाहिए वो पहले ना हो जाए, इसलिए इस स्थिति से बचने के लिए सुक्खू द्वारा इस तरह का बयान दिया गया है। क्योंकि अगर कांग्रेस के भीतर की यह गुटबाजी चुनाव से पहले ही उभरकर जनता के सामने आ जाती है, तो इससे पार्टी की छवि पर अच्छा ख़ासा डेंट लगेगा। ऐसे में सुक्खू ने बीच का रास्ता निकालते हुए बिना सीएम फेस के चुनाव मैदान में उतरने की बात कही है। 

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