हिमाचल में बाढ़-बारिश तो आएगी पर नहीं होगा नुकसान: सरकार ने किया ख़ास प्रबंध, जानें

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हिमाचल में बाढ़-बारिश तो आएगी पर नहीं होगा नुकसान: सरकार ने किया ख़ास प्रबंध, जानें


कुल्लूः
हिमाचल प्रदेश में बारिश के मौसम के दौरान अत्याधिक बारिश होने की वजह से कई सारे क्षेत्रों में बाढ़ की समस्या सामने आती है। बीते सालों में सूबे के कांगड़ा, कुल्लू, समेत कई जिले के लोगों को बाढ़ की इस विभीषिका की वजह से अच्छा ख़ासा नुकसान उठाना पड़ा था। 

2 घंटे पहले ही चल जाएगा बढ़ आने का पता 

वहीं, अब खबर आ रही है कि आने वाले दिनों में सूबे के लोगों को इस तरह की समस्या से छुटकारा मिल जाएगा। क्योंकि उन्हें बाढ़ आने के दो घंटे पूर्व ही इसकी जानकारी हो जाएगी, जिससे वे समय पर पलायन कर खुद को आसानी से बचा सकेंगें। 

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नेशनल हिमालयन प्रोजेक्ट के तहत गोविंद वल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयन पर्यावरण संस्थान हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के कई भागों में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस लर्निंग सिस्टम लगाने जा रहा है। इस सिस्टम के तहत आते दो किलोमीटर एरिया के लोगों को बारिश तथा बाढ़ की जानकारी का पता दो घंटे पहले ही लग जाएगा। इससे जिले में बारिश तथा बाढ़ के कारण होने वाले जान-माल के नुकसान को रोका जा सकेगा। 

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मिली जानकारी के मुताबिक यह आर्टिफिशिय इंटेलीजेंस लर्निंग सिस्टम सीएसआईआर 4 पीआई संस्थान बेंगलुरु के सहयोग से तैयार किया जाएगा। हालांकि, वर्तमान में संस्थान में मौजूद सिस्टम 24 किलोमीटर दायरे में मौसम के हालत की जानकारी देता है। परंतु कुल्लू जिले में हुए अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में यहां की भौगोलिक परिस्थितियों को मद्देनजर रखते हुए दो किलोमीटर क्षेत्र में सूचना देने पर सहमति बनी है। 

20 सालों के रिकॉर्ड के आधार पर बनेगा सिस्टम

बता दें कि नेशनल हिमालयन प्रोजेकट के अंतर्गत सीएसआईआर ने पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रदेश के कुल्लू जिले का चयन किया है। इसके अंतर्गत जीवी पंत संस्थान की ओर से जिले में मौजूद पार्वती वैली, मनाली तथा आसपास के इलाकों में बाढ़, तूफ़ान व बारिश से हुए नुकसान का बीते 20 सालों का रिकॉर्ड सीएसआईआर को दिया गया है। 

सैटेलाइट से जोड़ा जाएगा सिस्टम

इसी रिकॉर्ड के आधार पर संस्थान की ओर आर्टिफिशिय इंटेलीजेंस लर्निंग सिस्टम तैयार किया जाएगा। सिस्टम तैयार होने के बाद इससे संबंधित उपकरण पार्वती वैली, मनाली तथा ब्यास नदी के किनारे तथा संस्थान में लगाए जाएंगे तथा इसके साथ ही इस सिस्टम को सैटेलाइट के साथ भी जोड़ा जाएगा। 

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एक साल के भीतर लगेगा सिस्टम

एक वर्ष के भीतर इस सिस्टम को जिले के इन भागों में लगाया जाएगा। इससे प्राइमरी तथा सेंकेडरी डाटा सहित सैटेलाइट के जरिए यह जाना जाएगा कि इलाके में अधिक बारिश तथा बाढ़ की संभावना तो नहीं है। दो किलोमीटर एरिया के तहत यह जानकारी मिलेगी तथा इलाका वासियों को पहले ही अलर्ट कर दिया जाएगा। 

जानें क्या बोले प्रभारी

इस संबध में जानकारी देते हुए जीवी पंत राष्ट्रीय हिमालयन पर्यावरण संस्थान मौहल के केंद्र प्रभारी डा। राकेश सिंह ने बताया कि संस्थान सीएसआईआर 4पीआई बेंगलुरू आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस लर्निंग सिस्टम तैयार करवा रहा है। इसे कुल्लू जिला के विभिन्न स्थानों पर लगाया जाएगा। इससे बारिश, बाढ़ आदि की जानकारी हर दो किलोमीटर के क्षेत्र में पहले मिल जाएगी।

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